Mon. Jul 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

बुद्ध, तुम कब आओगे… ? : कैलाश महतो

 

बुद्ध, तुम कब आओगे… ? कैलाश महतो

हर साल बैशाख में तेरे, याद में लोग चिल्लाते हैं,
उसी तिथि पर, उसी मिति पर, फरियाद लोग सुनाते हैं ।
न तुम होते हो, न वो दिन होता है, होता है दिखावा केवल,
संस्थायें होती हैं, संस्थापक होते हैं, जपते तेरे नाम के लेवेल ।

बुद्ध ! आओ, देखो, देखो तुम्हारी दुनियाँ है कैसी !,
तुमने हमें जो दुनियाँ दी थी, तेरी दुनियाँ अब न है वैसी ।
बिगडा तेरा घर संसार सब, क्यों किया किसपे ऐतवार तब ?,
आकर देखो वतन को अपने, कैसे हुए हैं चिरफार अब ।

यह भी पढें   100 दिनों की चुप्पी के बाद संवाद की राह पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, उद्योग जगत से लेकर शिक्षाविदों तक बढ़ाया संपर्क

वसुधा की वो सम्यक तुम्हारा, गुम हो गयी है वादों में,
कब आओगे, नयन बिछाये, बैठे हैं हम राहों में ।
याद न आओ, काम में आओ, महापरिनिर्वाण त्यागो तुम,
जन्मभूमि बना है बंजर देखो, नये अवतार में आओ तुम ।

तुम बने हो मूरत केवल, गोरख धन्धे तेरे नाम पर चलते,
वे करते हैं बिक्री तेरी, मालामाल वो बनते चलते ।
देख लो अपने चक्षु से फिर, शर्म से तुम मर जाओगे,
याद में आना छोड जा अब तुम, नहीं तो खुब पछताओगे ।

यह भी पढें   बाढ़ और भूस्खलन के कारण देश भर के विभिन्न सड़कें अवरुद्ध

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *