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प्राकृतिक सुरक्षा के क्षेत्र में नेपाल और भारत को मिलकर काम करना चाहिए : डा. विजय पण्डित

 

१० मई , २०१८ को श्री लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने अपना वार्षिकोत्सव एवं २४ वाँ स्रष्टा सम्मान कार्यक्रम एक भव्य समारोह के साथ आयोजित किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष माननीय बसन्त चौधरी जी ने की । समारोह के मुख्य अतिथि नेपाली साहित्य के जाने माने स्रष्टा कालीप्रसाद रिजाल थे तथा मुख्य अतिथि के पद पर मेरठ (भारत) से पधारे साहित्यकार एवं पर्यावरण संरक्षक डा.विजय पण्डित जी की गरिमामयी उपस्थिति थी । आपको श्री लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर की ओर से सम्मानित किया गया । आप भारत और नेपाल में पर्यावरण संरक्षण का काम पिछले दस वर्षों से करते आ रहे हैं । आप का आह्वान है कि वृक्षारोपण करें जो जीवन के साथ भी है और जीवन के बाद भी है ।

प्रकृति हमारी जननी है जिसकी सुरक्षा ही हमें और हमारी आने वाली पीढी को सुरक्षित रख सकती है । आपने अपने मंतव्य में इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रकृति संरक्षण के लिए दोनों देशों को मिल कर काम करना चाहिए । वहीं उन्होंने यह भी कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है इसके लिए हमें सरकार के कार्यों का इंतजार ना कर स्वयं आगे आना होगा । बागमती की सफाई के लिए भी आप संस्थागत तौर से प्रयत्नशील हैं । आप हिमालिनी से आबद्ध हैं और आपका मानना है कि हिमालिनी नेपाल और भारत के बीच सेतु का काम कर रही है । हिमालिनी के द्वारा नेपाल की जानकारी भारत के पाठकों को मिलती है ।

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