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विद्यापति की रचनाएं भारत नेपाल दोनो देशों के साहित्य में घुली है : नरेंद्र मोदी

 


माला मिश्रा बिराटनगर । जनकपुर के बारहबीघा मैदान के विशाल जनसभा  में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  मैथिली भाषा मे संबोधन के साथ
पग पग पोखरि माछ मखान
सरस बोल मुस्की मुस्कान
विद्या ,वैभव ,शांति प्रतीक
सरस क्षेत्र मिथिलांचल थिक                                                     लाखो दर्शक में उत्साह पैदा कर  तालिया बटोरी । उन्होंने संबोधन के शुरुआत में कहा ‘
राजा महर्षि जनक आउर जगत माँ जानकी की पवित्र भूमि मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी में हमरा न्यौता  दअ क बजेलौ आ  ई सम्मान देलौं एकरा लेल  हम सम्पूर्ण मिथिलाक जनकपुर वासी के नमन करैत आभार प्रगट करै छि” उन्होंने कहा

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मिथिला की संस्कृति और साहित्य,  मिथिला की लोक कला , मिथिला की स्वागत सम्मान सबकुछ अदभुत है । दुनिया मे मिथिला संस्कृति का स्थान बहुत ऊपर है । महाकवि विद्यापति की रचनाएं आज भी भारत और नेपाल के लिए समान रूप से महत्व रखती है  इनके शब्दो का मिठास आज भी भारत और नेपाल दोनो के साहित्य घुली हुई है । उन्होंने कहा मैथिली  कला ,भाषा संस्कृति  और सभ्यता की चर्चा विश्व स्तर पर होते रहती है ।दोनो देश  जब मैथिली विकास के लिए  मिलकर सामूहिक प्रयास करेंगे तो तब इस भाषा का  विकास और अधिक  आसान हो जाएगा । उन्होंने कहा कि मुझे पता चला है कि  कुछ मैथिली फिल्म निर्माता  अब नेपाल भारत समेत  कतार , दुबई  में भी एकसाथ कई फिल्में रिलीज करने जा रहे है । ये एक स्वागत योग्य कदम है  । इसको बढ़ावा देने की आवश्यकता है । उन्होंने मिथिला पेंटिंग पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्व मे इसका चर्चा होता है इसको इस मुकाम पर  पहुचने में मिथिला के माता ,बहनों  का मेहनत है उनका प्रशंसा करते हुए तारीफ किया ।

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