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सत्ता के लिए राजपा ने केपी ओली को वोट नहीं दिया है : अनिल झा,

 

हिमालिनी, मई अंक , २०१८ | विभिन्न ६ राजनीतिक दल इकठ्ठा होकर राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) का निर्माण हुआ है । जब तक हम लोग एक साथ रहेंगे, एकताबद्ध होकर रहेंगे, तब तक मधेश की जनता भी हमें सम्मान करने के लिए, जनादेश देने के लिए तैयार हैं । इस बात की पुष्टि चुनाव से हो चुकी है । जिस समय राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) गठन हो रही थी, उस समय हम लोगों ने कहा था कि एक साल के अन्दर पार्टी महाधिवेशन किया जाएगा । लेकिन इसी अवधि में राजपा को स्थानीय, प्रदेश और केन्द्रीय चुनाव को सामना करना पड़ा । जिसके चलते निर्धारित समय में महाधिवेशन नहीं हो सका । अब तो चुनाव सम्पन्न हो कर भी उसका परिणाम आ चुका है । इसीलिए हम लोग अब १ साल के अन्दर महाधिवेशन करेंगे, इसका कोई विकल्प नहीं है ।
अभी हमारे सामने जो संविधान है, वह पूर्ण नहीं है । उसमें संशोधन की आवश्यकता है । संविधान संशोधन के लिए एमाले का साथ जरूरी है । एमाले–माओवादी को ‘पुस’ करके भी संविधान संशोधन के लिए राजी करवाना है । अगर संविधान संशोधन के लिए एमाले–माओवादी गठबन्धन राजी नहीं हुआ तो भी हमारा महाधिवेशन रुकनेवाला नहीं है । महाधिवेशन के बाद मधेश मुद्दा सम्बोधन के लिए फिर से वैकल्पिक रास्ता ढूंढ़ना पड़ेगा । वैकल्पिक रास्ता क्या हो सकता है इसके संबंध में पार्टी महाधिवेशन में ही वृहत बातचीत की जाएगी । जिन राजनीतिक दलों के पास सत्ता में जाने के लिए और संविधान संशोधन के लिए बहुमत नहीं है, उस को तो जनता में जाने से दूसरा विकल्प नहीं है । अर्थात् सड़क में जाना पड़ता है । कहने का मतलव यह है कि अगर सत्ताधारी दल संविधान संशोधन के लिए तैयार नहीं होगी तो संशोधन के लिए शायद हम लोगों को सड़क संघर्ष करना ही पड़ेगा ।

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अनिल झा, सांसद्
नेता, अध्यक्ष मण्डल

हां, राजनीतिक वृत्त में राजपा के सरकार में जाने की बात होती है । लेकिन हम लोग ऐसी मनःस्थिति में नहीं हैं । कुछ लोगों में एक विरोधाभास है कि सरकार में जाने के लिए ही राजपा ने केपीशर्मा ओली को वोट दिया है । लेकिन यह सच नहीं है । प्रदेश नं. २ में राजपा और फोरम गठबन्धन में निर्मित सरकार को एमाले ने वोट दिया, उसके बदले हम लोगों ने केपीशर्मा ओली को वोट दिया है । दूसरा महत्वपूर्ण कारण तो यह है कि एमाले–माओवादी गठबंधन के अलावा अन्य कोई भी गठबन्धन तथा ‘एलायन्स’ संविधान संशोधन नहीं कर सकता । एमाले के अलवा संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत सम्भव भी नहीं है । संविधान संशोधन के लिए सहज दो तिहाई मत मिल सके, इसलिए हम लोगों ने एमाले को वोट दिया है ।

अब प्रश्न उठता है कि क्या एमाले संविधान संशोधन के लिए तैयार है ? यह भी नहीं दिख रहा है । लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए कि तराई–मधेश अर्थात् प्रदेश नं. २ में एमाले को जितना वोट मिला है, राजपा–फोरम गठबंधन को उससे अधिक वोट मिला है । एमाले पार्टी को इन मतों का सम्मान करना चाहिए । दूसरी बात, जो तराई–मधेश में रहकर संघीयता चाहते, अपनी पहचान और अधिकार चाहते है, हिन्दी भाषा भी चाहते है, लेकिन वोट एमाले को देते हैं तो उन लोगों को भी सोचने का समय आ गया है । दो तिहाई बहुमत के करीब होते हुए भी एमाले क्यों संविधान संशोधन के लिए तैयार नहीं है ? तराई मधेश में रहकर एमाले को वोट देनेवाले मतदाता खुद के लिए यह प्रश्न है ।

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