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संघीयता कार्यान्वयन करने की इच्छा शक्ति सरकार में नहीं हैः सांसद कर्ण

 

काठमांडू, २८ जून । राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल के सांसद् लक्ष्मणलाल कर्ण ने कहा है कि वर्तमान सरकार में संघीयता कार्यान्वयन करने की इच्छा शक्ति ही नहीं है । उनका मानना है कि वर्तमान सरकार ने संघीयता को बाध्याता के रुप में स्वीकार किया है, इसीलिए सरकार में रहनेवाले चाहते है कि संघीयता असफल हो जाए । बिहीबार संसद में पेश ‘जरुरी सार्वजनिक महत्व’ संबंधी प्रस्ताव के ऊपर विचार–विमर्श करते हुए सांसद् कार्ण ने यह बात कहा है ।
स्मरणीय है– आज बिहीबार आयोजित संसद् बैठक में नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के सांसद खगराज अधिकारी ने प्रस्ताव किया है– ‘आर्थिक वर्ष २०७५–०७६ के लिए तय पीने की पानी निर्माण संबंधी आयोजना, सडक, ढल, सिचाई तथा अन्य आयोजना केन्द्र सरकार को ही सपन्न करना चाहिए, उसके बाद ही स्थानीय तथा प्रदेश सरकार को हस्तान्तरण करना चाहिए ।’ इसी प्रस्ताव के ऊपर सांसदों के बीच मतान्तरण दिखाई दिया है ।
प्रस्ताव के ऊपर विचार विर्मश करते हुए राजपा संसाद् कर्ण कहते हैं– ‘प्रदेश तथा स्थानीय तहों को जो आयोजना मिली है, उसको पुनः केन्द्र में ले जाने के लिए जो प्रस्ताव सरकार पक्षीय सांसद की ओ रसे आया है, वह खेदजनक है ।’ उनका मानना है कि किसी भी बहनाबाजी में इस तरह प्रदेश और स्थानीय तहों को प्राप्त आयोजना केन्द्र में वापस करना ठीक नहीं है । प्रस्ताव के ऊपर अपना मन्तव्य रखते हुए प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के सांसद अतर कलाम मुसलमान ने भी कहा है कि स्थानीय तहों के प्राप्त अधिकार को पुनः केन्द्र में ले जाना संघीयता की मर्म विपरीत है ।
लेकिन प्रस्ताव के ऊपर अपने मनतव्य रखनेवाले सत्ता पक्षीय नेताओं को मानना है कि प्रस्ताव सकारात्मक है । ऐसी ही मन्तव्य रखनेवाले सांसद् हैं– विशाल भट्टराई, सरिता न्यौपाने और ध्रुव शाही । उन लोगों को मानना है कि निर्धारित समय में काम सम्पन्न करने में विलम्ब करनेवाले ठेकेदारों को कारवाही कर आयोजना सम्पन्न करके ही स्थानीय तहों को हस्तान्तरण करना चाहिए ।

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