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“थई कडी कडी” जनता कर से मरी मरी

 

व्यंग्य

बिम्मीकालिंदीशर्मा
चार धामों में से एक ओडिसा के पूरी में भगवान जगन्नाथजी का दर्शन करने जाते समय वहां के छोटे मोटे पंडे या पुजारी भक्तों को छड़ी या छोटे डंडे से “थई कड़ी कड़ी” करते हुए पीठ पर मारते हैं और उस के बदले में पैसे मागंते है । यह छड़ी दर्शन करने आए हुए भक्तो को इसीलिए मारा जाता हैं कि उन के पाप मिट जाए या घट जाएं । और पाप घटाने या मिटाने के बदले में उनको पैसा देना पड़ता है वह भी जबरदस्ती । हमारी दो तिहाई बहूमत से गठन हुई सरकार भी ऐसा ही कर रही है अपने नागरिकों से कर (टैक्स) वसूलने के बहाने डंडे से मार कर उन्हे “थई कडी कडी” कर रही हैं ।
ओडिया भाषा में कहा जाने वाला थइ कडी कडी का हिन्दी में क्या अर्थ होता है यह तो नहीं पता । पर सरकार हर चीज और हर क्षेत्र में कर का डंडा लगा कर अपने नागरिकों से “थई कडी कडी” करा रही हैं । बेचारा देश का आम नागरिक पीठ पर कर का डंडा खा कर सचमुच में थई कडी कडी हो रहा हैं । सरकार का वश चले तो वह सिर के बाल के हर रोंए पर और हर सांस पर कर लगा दें । देश में नए नवेले मुलुकी ऐन के लागू होने और उस में दंड, सजा और जेल यात्रा की जो व्यवस्था की गइ है उस के कारण सरकार की रेल यात्रा फेल खा जाएगी शायद । कहां तो दो तिहाई बहूमत की सरकार सरल और सुगम यातायात के लिए देश में रेल का निमार्ण करने वाली थी । और उस के लिए डिपीआर बनाने की जगह सरकार मुलुकी ऐन बना लाई और रेल के जगह पर बन गया जेल ।
सरकार ने नएं मुलुकी ऐन में सजा के लिए जितने जेल भूक्तान की व्यवस्था की है उस को देख कर तो लगता है देश में एफएम स्टेशन से भी ज्यादा जेल स्टेशन की जरुरत होगी । कोई चूं भी बोला या किसी का बाल भी बांका हुआ तो सीधे जेल । दायां, बांया कुछ नहीं, सरकार को इतनी ज्यादा जेल कि जरुरत पडेÞगी कि प्राइवेट सेक्टर फ्लैट या अपार्टमेंट की तर्ज पर जेल बना कर किराए पर देगा या सरकार को बेचेगा । नएं मुलुकी ऐन के माध्यम से दो तिहाई की इस अलौकिक सरकार ने रोजगार के नए, नए अवसर दिए हैं । इन में से जेल भी एक है । जेल के इस खेल में रेल कहीं पीछे छूट गया और सरकार दोनों कर (हाथ) में कर को उठा कर आगे बढ गई है ।
अब तो कहीं अपने रसोई घर में पीढा में बैठ कर भी खाना खाए तो उसे भूमि में बैठ्ने के एवज में भूमि कर देना पडेÞगा । किसी की तबियत ज्यादा खराब हो गई और वह लंबी, लंबी या जल्दी, जल्दी सांस लेने लगेगा तो उस में भी कर लगेगा । भीख मांगो या शादी के लिए किसी का हाथ उस में भी कर देना है । बेचारा जो खुद भीख माग कर गुजर, बसर कर रहा है वह कर कैसे देगा ? यदि उस के पास सरकार को देने के लिए पैसे होते तो वह भीख क्यों मागंता भला ? एक हरि तन्नम आदमी से उस की फटी हुई लगोंट भी नोच, खसोट कर लेने के लिए सरकार उद्धत है ।
देश में संघीयता क्या आ गई देश के नागरिकों की जान ही आफत में आ गई है । अब अपने घर के अंदर शांति से रहने के लिए भी सरकार को कर देना पडेÞगा नहीं तों शांति को दूर भगा कर सरकार अशातिं को घर में प्रवेश करा देगी । आखिर में दो तिहाई की सरकार है जो भी कर सकती है । यह सरकार सब सेवा और वस्तुओं में तो कर लगा रही हैं पर जो लोग दो से ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं उन के माथे पर कर की हांडी क्यों नहीं फोडती । इस बिषय में कर लगाने को ले कर कहीं भविष्य में अपना वोट बैंक बढेगा यही सोच कर सरकार मौन तो नहीं हैं ?जो हद से ज्यादा बोलते हैं या दूसरों को अनाप, शनाप गाली देते हैं उन के लिए भी कर या सजा की व्यवस्था होनी चाहिए ।
पर सरकार तो “थई कडी कडी” कर के देश के सीधे सादे नागरिको पर ही कर का कोड़ा बरसा रही है । अब कोड़ा मार दिया है तो दर्द से बिलबिलाते हुए भी कर देना पडेगा नहीं तो और डंडे खाओ । कर भी दो डंडे भी खाओ यानी कि सजा भी भुगतो पर आप की गलती, अपराध या पाप कर के डंडे से कम हो जाएगें या खतम हो जाएगें इस बात कि कोई ग्यारेंटी नहीं है । यदि आप दो तिहाई बहुमत से बनी हुई सरकार के प्यारे या राजदुलारें हैं तो कर का डंडा नहीं भी खाना पड़ सकता है । वरना तो आप“थई कडी कडी” से नहीं बच सकते । क्योंकिहमारे देश की सरकार भगवानजगन्नाथकि तरह दयालु नहीं हैं कि आपको माफ कर के और डंडे खानें से बचा ले । जय हो इस “थई कडी कडी” की । इस को मंत्र बना कर जाप करते रहिए क्या पता भगवान जगन्नाथ खुश हो कर आपको आशिर्वाद दे दें ।

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