पप्पु कन्ट्रक्सन के प्रमुख रौनियार को गिरफ्तारी के लिए अदालती पत्र, निर्माण व्यवसायियों की अपत्ति
रौतहट, २५ सितम्बर । पिछले समय चर्चा–परिचर्चा में रहे पप्पु कन्ट्रक्सन के प्रमुख सुमित रौनियार को गिरफ्तार करने के लिए जिला अदालत रौतहट ने एक पत्र जारी किया है । गत भाद्र ९ गते रौतहट जिला स्थित लालबकैया नदी (टिकुलिया) में हुई नाव दुर्घटना संबंधी घटना में अनुसंधान के लिए रौनियार को बुलाया गया था, लेकिन रौनियार अनुपस्थित रहे । इसीलिए उनके विरुद्ध गिरफ्तारी पुर्जी जारी किया गया है । अदालत द्वारा जारी पत्र जिला पुलिस कार्यालय रौतहट में पहुँच गया है ।
स्मरणीय है, भाद्र ९ गते की नाव दुर्घटना में ५ लोगों की जान गई थी । नदी में निर्माणाधीन पुल में नाव टकराने के कारण उक्त दुर्घटना हुई थी । स्थानीय लोगों का कहना है कि पप्पु कन्ट्रक्सन द्वारा निर्माणाधीन पुल निर्धारित समय में सम्पन्न न होने के कारण ऐसी अनपेक्षित दुर्घटना हुई है । इसी आरोप के साथ स्थानीबासियों ने पप्पु कन्ट्रक्सन के विरुद्ध मुद्दा पंजीकृत किया था । पंजीकृत मुद्दा में अनुसंधान के लिए पुलिस ने कन्ट्रक्सन के प्रमुख सुजित रौनियार को उपस्थिति के लिए कहा था ।
निर्माण व्यवसायियों की अपत्ति
इसीतरह निर्माण व्यावसायी संघ ने पप्पु कन्ट्रक्सन के संबंध में विभिन्न मीडिया में प्रकाशित समाचारों के प्रति आपत्ति प्रकट किया है । संघ की ओर से अध्यक्ष दयाराम साह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि निर्माण व्यवसायियों को दोषी करार करने के लिए कुछ संचारकर्मी तथा राजनीतिक दलों की आचरण अराजक और शंकास्पद दिखाई दे रही है । विज्ञप्ति में आगे कहा है– ‘रौतहट टिकुलिया स्थित लालबकैया नदी में हुए दुःखद दुर्घटना संबंधी विषयों को लेकर पप्पु कन्ट्रक्सन को जोड़कर जिस तरह कम्पनी और समग्र निर्माण व्यवसायी क्षेत्र को मान–मर्दन किया जा रहा है, वह आपत्तिजनक है ।’
संघ का कहना है कि उक्त दुर्घटना के पीछे पम्पु कन्ट्रक्सन दोषी नहीं है । विज्ञप्ति में आगे कहा है– ‘पुल निर्माण शुरु होने से पहले ही वहां नाव चलता था । नाव पुल की दक्षिण की ओर से लाना चाहिए था, लेकिन उक्त दिन नाव संचालक ने उत्तर की ओर से ले गया, जिसके चलते नदी की बहाव ने नाव को पुल की ओर धकेल दिया ।’ संघ ने कहा है कि कम्पनी को दोषी दिखाने के लिए और बदनाम करने के लिए पूर्वाग्राही तवर से मीडियाबाजी करना राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित होना है । संघ का यह भी मानना है कि सरकारी निकायों की गलती को छुपाने के लिए भी यह सब हो रहा है । विज्ञप्ति में आगे कहा गया है– ‘कोई भी निर्माण कार्य में होनेवाला विलम्ब में सरकारी कार्यालयों की प्रक्रियागत और परिस्थितिजन्य ढिलासुस्ती भी होती है, ऐसी अवस्था में सम्पूर्ण दोष निर्माण कम्पनी को देना न्याय संगत नहीं है ।’
संघ ने कहा है कि नेपाल में कूल १ हजार ५ सौ पुल निर्माणाधीन है । उसके लिए कूल ६३ अर्ब बजेट की आवश्यकता है, लेकिन सडक विभाग ने सिर्फ २ अर्ब रुपयां विनियोजित किया है । जिसके चलते कोई भी काम निधारित समय में सम्पन्न नहीं हो पाया है । विज्ञप्ति में आगे कहा गया है– ‘सम्पूर्ण दोष निर्माण व्यवसायियों के ऊपर थोपा जाता है, जिस को घोर भत्सर्ना किया जाता है ।’



