गजल
शारिक रब्बानी
अपना ये दिलो जां हम कुरबान करेंगे
नेपाल की धरती का यूं सम्मान करेंगे ।
प्रेम की नदियां जो बहती हैं यहां पर
दिन रात इसी मे हम स्नान करेंगे ।
आपस में लड़ाने का हुनर नहीं रखते
ये काम जमाने में तो शैतान करेंगे ।
नेपाल की धरती को हम खूब संवारेंगे
हर घर को मुहब्बत का गुलदान करेंगे ।
जी शान उसे ‘शारिक’ बतलायेंगे हर एक से
इन्सान की इज्जत जो इन्सान करेंगे ।
अध्यक्ष, अन्जुमन शाहकार–ए–उर्दू उत्तर प्रदेश




