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    शारिक रब्बानी

अपना ये दिलो जां हम कुरबान करेंगे
नेपाल की धरती का यूं सम्मान करेंगे ।
प्रेम की नदियां जो बहती हैं यहां पर
दिन रात इसी मे हम स्नान करेंगे ।
आपस में लड़ाने का हुनर नहीं रखते
ये काम जमाने में तो शैतान करेंगे ।
नेपाल की धरती को हम खूब संवारेंगे
हर घर को मुहब्बत का गुलदान करेंगे ।
जी शान उसे ‘शारिक’ बतलायेंगे हर एक से
इन्सान की इज्जत जो इन्सान करेंगे ।

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अध्यक्ष, अन्जुमन शाहकार–ए–उर्दू उत्तर प्रदेश

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