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#Makar_Sankranti_2019:जानिए मकर संक्रांति में क्यों खाए जाते हैं तिल-गुड़ के व्यंजन और खिचड़ी 

 

कोई भी त्यौहार हो उसमें कुछ खास व्यंजन बनाए जाते हैं और खाए जाते हैं. चाहे वो दिवाली हो या फिर होली, हर खास मौके पर कुछ न कुछ खास चीजें जरूर बनाई जाती हैं. इसे लोग परंपरा से भी जोड़कर देखते हैं. लेकिन क्या आप जानना चाहेंगे मकर संक्रांति के मौके पर तिल-गुड़ से बनी चीजें क्यों खाई जाती हैं? अगर नहीं जानते हैं तो हम बता रहे हैं कि आखिर क्यों तिल-गुड़ का सेवन इस खास मौके पर किया जाता है.

 

तिल और गुड़ से जुड़े वैज्ञानिक तर्क मकर संक्रांति के पर्व पर तिल व गुड़ का ही सेवन क्‍यों किया करते है इसके पीछे भी वैज्ञानिक आधार है, दरअसल सर्दी के मौसम में जब शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है तब तिल व गुड़ के व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं, क्‍योंकि तिल में तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जिसका सेवन करने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और जो हमारे शरीर को गर्माहट देता है। इसी प्रकार गुड़ की तासीर भी गर्म होती है। तिल व गुड़ के व्यंजन सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति के अवसर पर तिल व गुड़ के व्यंजन प्रमुखता से बनाए और खाए जाते हैं।

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वैज्ञानिक और सामाजिक कारण

 

मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी खाने की परंपरा के पीछे वैज्ञानिक और सामाजिक कारण भी है। दरअसल भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि का आधार सूर्य को माना गया है। मकर संक्रांति के आस-पास धान की फसल तैयार हो जाती है। घर में नए फसल का प्रयोग करने से पहले सूर्य देव को इसका भोग लगाया जाता है। यह सामाजिक परंपरा सदियों से चली आ रही है। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि जो मुझे अर्पित किए हुए बिना अन्न ग्रहण करता है वह चोर है। इस धार्मिक मान्यता के कारण भी मकर संक्रांति पर उड़द की दाल और चावल से खिचड़ी पकाई जाती है और देवताओं को भोग लगाया जाता है।

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मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने का वैज्ञानिक कारण यह है कि इस समय शीतलहर चल रही होती है। शीत ऋतु में ठिठुरन से रक्षा के लिए और तुरंत उर्जा के लिए खिचड़ी को उत्तम माना गया है क्योंकि इसमें नए चावल के साथ, उड़द की दाल, अदरक, कई प्रकार की सब्जियों का प्रयोग किया जाता है जिससे इसकी तासीर गर्म होती है। तिल और गुड़ की तासीर भी गर्म होती है इसलिए मकर संक्रांति पर इसे खाने की परंपरा रही है।

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