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पौष पूर्णिमा 2019 कल व्रत विधि और महत्व !

 

सोमवार को पुष्य नक्षत्र में सोमवती पौष पूर्णिमा कल :-

कल के स्नान और दान करने से सबको मिलेगा विशेष लाभ !

शास्त्रों के अनुसार जब सोमवार को पूर्णिमा  होता है तब के स्नान, दान, व्रत, एवं अभिषेक का अति दुर्लभ महत्व होता है । इस दिन महास्नान करना हर प्राणी मात्र के लिए बेहद शुभ माना गया है। पौष सोमवती पूर्णिमा के इस पवित्र दिन पर दुनिया भर के लोग प्रयाग के कुम्भ में या पवित्र नदियों में स्नान या डुबकी लगाते है। चूकि शास्त्रों में पौष का महीना सूर्यदेव का माना जाता है और वहीं पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा की तिथि होती है। ऐसे में जब सूर्य और चंद्रमा का यही अद्भुत संयोग बनता हैं तो उसे हम ज्योतिष शास्त्रों में पौष पूर्णिमा कहते है। मान्यता हैं कि इस दिन सूर्य और चंद्र की उपासना कर कोई भी व्यक्ति अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है।
पूर्णिमा यानि “पूर्णो मा” जिसमें मास का अर्थ होता है चंद्र। अर्थात जिस दिन चंद्र देव अपने पूर्ण आकार में होते है तो उसी दिन को पूर्णिमा कहा जाता है। इस मे भी जब पूर्णिमा सोमवार को पड़े तो दुर्लभ संयोग बनता है जिस दिन दान एवं पूजन से कुंडली के सभी मातृ दोष, केमद्रुम दोष समाप्त हो जाता है । पौष और माघ माह की पूर्णिमा का हर शास्त्र में हमेशा से ही अपना एक अलग ही अत्यधिक महत्व रहा है ।
कल सोमवार को 11:15 तक पूर्णिमा रहेगी । अतः आप भी इस पवित्र माह का स्वागत करने वाली इस मोक्षदायिनी पूर्णिमा पर भगवान की अराधना व इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान ध्यान, दान आदि से पुण्य कमा सकते है।
पौष पूर्णिमा को मोक्ष दिलाने वाली सबसे शुभ तिथि के रूप में देखा जाता रहा है। क्योंकि इसके बाद ही माघ महीने की शुरुआत होती है। इसके अलावा माघ महीने में किए जाने वाले स्नान की शुरुआत भी पौष पूर्णिमा की शुभ तिथि के साथ ही हो जाती है। इसलिए प्राचीन काल से ही ये मान्यता है कि जो कोई भी इस दिन विधिपूर्वक प्रात:काल स्नान और व्रत करता है वह सीधे-सीधे मोक्ष का अधिकारी हो जाता है। उसे इस धरती पर जन्म-मृत्यु के चक्कर से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। अर्थात उसको मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। चूंकि माघ माह को बेहद शुभ व इसके प्रत्येक दिन को सबसे ज्यादा मंगलकारी माना गया है इसलिए इस दिन जो भी कार्य आरंभ होते है उसका फल हमेशा अच्छा और जल्दी मिलता है। इस ख़ास दिन पर स्नान के पश्चात अपनी इच्छा अनुसार दान करने का भी महत्व देखा गया है।
पौष पूर्णिमा के पुण्य प्रभाव से सब को उत्तम आयु आरोग्यता , यश मान प्रतिष्ठा , सुख साम्राज्य एवं सर्वत्र विजय प्राप्त हो , आचार्य राधाकान्त शास्त्री ।

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