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देश और दुनिया में बढ़ रहा है हिंदी का वर्चस्व : अबू धाबी की अदालतों में हिंदी के तीसरी भाषा बनने का महत्व

 

फरवरी १२

हिंदी अब कहां नहीं है। हिंदी का राज अब दूर-दूर तक है। लगभग दुनिया के हर हिस्से में अब आपको कोई न कोई हिंदी बोलने वाला मिल जाएगा। भारत माता के माथे की बिंदी हिंदी अब विदेशों में भी सम्मानजनक दर्जा हासिल कर भारत का मान बढ़ा रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में हिंदी को अदालत की तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना दुनिया भर में हिंदी को मिल रहे सम्मान की एक और नई मिसाल बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने देश में रह रहे हरेक तबके और समुदाय तक न्याय की पहुंच बढ़ाने के लिए अरबी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को अपनी अदालतों की तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

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न्यायिक विभाग की वेबसाइट पर हिंदी भाषियों के लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा
हिंदी भाषियों को अबू धाबी न्यायिक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। बता दें कि अबू धाबी में द्विभाषी कानूनी व्यवस्था का पहला चरण नवंबर 2018 में लॉच किया गया था। इसके तहत सिविल और वाणिज्यिक मामलों में वादी अगर विदेशी हो तो केस के दस्तावेजों का अनुवाद अंग्रेजी में करना होता था, लेकिन अब नए आदेश के बाद अनुवाद हिंदी में भी उपलब्ध हो सकेगा।

 

यूएई में हिंदी भाषियों को मिलता है बेहतर रोजगार
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पिछले दो-तीन दशकों में हिंदी भाषियों की संख्या बढ़ी है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात जाते हैं। इसके अलावा अपने देश के मुकाबले भारत के कुशल कारीगरों को भी वहां बेहतर दाम मिलते हैं। इसलिए वो भी वहां रोजगार के लिए जाते हैं और बहुत से वहीं बस जाते हैं। वहां रहने वाले पढ़े-लिखे भारतीयों की कामकाजी भाषा भले अंग्रेजी होती है, लेकिन अपने व्यक्तिगत जीवन में आकर वो भी हिंदी ही बोलते हैं।

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देश और दुनिया में बढ़ रहा है हिंदी का वर्चस्व
हिंदी को 14 सितंबर 1949 को भारत में राजभाषा का दर्जा मिला था। ये दिन देश और दुनिया में प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। मौजूदा दौर में हिंदी के विस्तार और विकास में बॉलीवुड और सोशल मीडिया का भी अहम योगदान रहा है। हिंदी फिल्मों के लिए जहां पूरी दुनिया बेचैन रहती है, वहीं हिंदी नेम प्लेट लगाना अब फैशन बन चुका है। साल दर साल हिंदी अब करोड़ों लोगों के लिए रोजगार का साधन बन रही है। टीवी और एफएम चैनलों ने हिंदी को ग्लोबल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश होने के कारण भारत दुनिया भर के लिए बड़ा बाजार है। ऐसे में यहां के खरीदारों को लुभाने के लिए ज्यादातर विज्ञापन हिंदी में बनते हैं।

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साभार दैनिक जागरण से

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