बेटियाँ ना ताे बेकार हैं ना ही बाेझ राखी दत्ता ने मिसाल पेश की । बचाई पिता की जान
समय के साथ बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता काफी बदली है, लेकिन आज भी कुछ लोग बेटियों को मजबूरी समझते हैं। इसे झुठलाते हुए राखी दत्ता ने मिसाल पेश किया है। राखी ने न सिर्फ संकीर्ण भावना वाले लोगों को आइना दिखाया है बल्कि उसने पिता से असीमित स्नेह का उदाहरण पेश करते हुए समाज में प्रेरणा जगाने की कोशिश की है।
१९ वर्षीय राखी ने अपनी जान, कष्ट एवं भविष्य का परवाह किए बिना पिता को अपने लीवर का ६५ फीसद हिस्सा दान कर दिया है। ऐसा उसने अपने पिता को लीवर संबंधित जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए किया है। इसके लिए उसे असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ा है। इसकी परवाह किए बिना उसने अपने पिता की जान बचाई है।
उद्यमी हर्ष गोयनका ने अपने ट्विटर पर एक बेटी की अपने पिता को लीवर दान करने की प्रेरणादायक घटना को साझा किया है। उन्होंने दत्ता और उनके पिता की तस्वीर साझा को भी साझा किया है। अपने पिता के लिए एक बेटी का प्यार हमेशा बहुत खास होता है।
राखी का यह कार्य बेटियों को बेकार समझने वाले सभी लोगों को जवाब है। गोयनका के ट्वीट को ५,००० से अधिक बार रीट्वीट किया गया है और २२,००० से अधिक लाइक्स मिले हैं।

