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जापान के नए सम्राट नारुहितो , अकिहितो को पारंपरिक रीति-रिवाजों से दी गई विदाई

 

टोक्यो, एपी/एएफपी।

जापान के सम्राट अकिहितो ने मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाज से राजगद्दी छोड़ दी। उनके बेटे क्राउन प्रिंस नारुहितो (59) ने मंगलवार मध्यरात्रि से उनकी जगह संभाल ली। वह जापान के 126वें सम्राट हैं।

बुधवार को नारुहितो की पारंपरिक ताजपोशी के साथ ही देश में नए युग की शुरुआत होगी। इसकी तैयारियों में पूरा देश जुटा है। नारुहितो सम्राट अकिहितो के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उनकी पत्नी का नाम मसाका है।

अकिहितो ने बतौर सम्राट अपने अंतिम संबोधन में सहयोग के लिए लोगों का आभार जताया और शांति की कामना की। स्वास्थ्य कारणों से पदमुक्त होने का एलान करने वाले 85 वर्षीय अकिहितो के राजगद्दी छोड़ने की प्रक्रिया मंगलवार सुबह कई रस्मों के साथ शुरू हुई।

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टीवी तस्वीरों में पारंपरिक पोशाक में दिखे अकिहितो सबसे पहले शाही परिवार की कुल देवी अमेतरासु के मंदिर में गए। वहां उन्होंने देवी को पद छोड़ने की सूचना देने की परंपरा निभाई। इसके बाद मध्य टोक्यो स्थित शाही महल में विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसमें शाही परिवार और प्रधानमंत्री शिंजो एबी समेत सरकार के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी सेवानिवृत्ति का एलान किया गया। इसके साथ ही जापान के सम्राट के तौर पर उनके युग का समापन हो गया। अकिहितो की विदाई के दौरान शाही महल के बाहर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा रहा।

दो सदी में राजगद्दी छोड़ने वाले पहले सम्राट

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करीब 200 साल में पहली बार ऐसा हुआ जब दुनिया के सबसे पुराने शाही परिवार में कोई सेवानिवृत्त हुआ। अकिहितो ने अपनी इच्छा से राजगद्दी छोड़ी।

खराब सेहत का दिया था हवाला

अकिहितो ने 2016 में अपनी उम्र और खराब सेहत का हवाला देकर शाही दायित्वों से मुक्ति की इच्छा जताकर सबको चौंका दिया था। प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे अकिहितो हार्ट सर्जरी भी करा चुके हैं। वह करीब तीन दशक से सम्राट थे।

बनाया गया था कानून

सम्राट अकिहितो के अप्रत्याशित एलान से जापान में चुनौतियां खड़ी हो गई थीं क्योंकि ऐसा कोई कानून नहीं था जिसमें सम्राट की सेवानिवृत्ति के लिए कोई व्यवस्था हो। ऐसी स्थिति में विशेष विधेयक लाकर सम्राट की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा को पूरा करने का फैसला किया गया। इसके लिए साल 2017 में संसद से विधेयक पारित कराकर नया कानून बनाया गया था।

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लोकप्रिय सम्राट रहे अकिहितो

साल 1989 में राजगद्दी संभालने वाले अकिहितो ने शाही परिवार की आम लोगों से निकटता बढ़ाई क्योंकि जापान के सम्राट शायद ही लोगों से मिलते थे। इस परंपरा के उलट वह अपनी पत्नी महारानी मिचिको के साथ लोगों के बीच जाते थे और खासतौर से उन लोगों से मिलते थे जो अपंगता या भेदभाव का सामना करते थे। इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी वह आगे रहते थे। इससे लोग उन्हें बड़े सम्मान से देखते हैं।

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