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भोजपुरी भाषा के भीष्मपितामह पं. दीपनारायण मिश्र जी का निधन, साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति

 

बीरगंज ३ मई

फाइल फाेटाे

नेपाल भोजपुरी समाज के संस्थापक और भोजपुरी  के भीष्मपितामह पं. दीपनारायण मिश्र जी का आज स्वर्गवास हाे गया । आपके निधन से समस्त भाेजपुरी समाज आहत है । आपका भाेजपुरी साहित्य में अमूल्य याेगदान रहा है । आपका अमूल्य याेगदान हिन्दी साहित्य में भी रहा है ।
भोजपुरी में लिखने के  कारण आपकाे वि.स. २०२८ में जेल जाना पडा था ।  आपके निधन से साहित्य जगत काे अपूरणीय क्षति हुई है  ।

दाे वर्ष  पहले साहित्यकार पं. दीपनारायण मिश्र का भव्य नागरिक अभिनन्दन किया गया था। जाे बीरगंज की धरती के लिए गाैरव का क्षण था । मिश्रजी की जीवन यात्रा अत्यन्त सफल मानी जा सकती है क्योंकि वीरगंज की धरती पर साधना करते हुए उन्होंने न केवल स्थानीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता स्थापित की वरन राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनायी थी।

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पंडित दीपनारायण मिश्र की यह विशेषता रही है कि किसी एक भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने स्वयं को सीमित नहीं किया । सर्वविदित है कि वीरगंज मूलतः भोजपुरीभाषी क्षेत्र है और भाषिक रूप में हिन्दी की भी यहाँ स्वीकार्यता है । एक बात यह भी है कि जिन दिनों भाषा और साहित्य के क्षेत्र में इनकी सक्रियता थी उस समय नेपाल में शिक्षा–दीक्षा की भाषा भी हिन्दी ही थी । लेकिन पंडितजी ने दोनों ही भाषाओं में अपनी कलम चलायी और अपने योगदान से उन्हें समृद्ध करने का प्रयास किया । इतना ही नहीं इनके विकास की भी चिन्ता इन्हें थी इसलिए ‘नेपाल भोजपुरी समाज‘ और ‘नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद’ के ये संस्थापक अध्यक्ष भी रहे और दोनों ही भाषाओं के प्रशंसकों और सर्जकों को यहाँ से उन्होंने न केवल संगठित किया बल्कि सर्जना के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया । यही कारण है कि आज दोनों ही भाषाओं से जुड़े लोग न केवल मिश्रजी का सम्मान करते हैं वरन उनके समक्ष श्रद्धानत भी होते हैं ।

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