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लोकसेवा–विज्ञापन विरुद्ध आदिवासी, जनजाति और मधेशियों की संयुक्त आन्दोलन

 

काठमांडू, १८ जून । लोकसेवा आयोग द्वारा सार्वजनिक विज्ञापन रद्द करने के लिए मांग करते हुए आदिवासी, जनजाति और मधेशी समुदायों ने संयुक्त आन्दोलन करने की चेतावनी दी है । संयुक्त समिति निर्माण कर उन लोगों ने कहा है कि सार्वजनिक विज्ञपान असमावेशी है, इसीलिए उसको रद्द करना चाहिए । आदिवासी, जनजाति, मधेशी, दलित, मुश्लिम, महिला, अपांगता हुए व्यक्ति, पीछड़ा हुआ क्षेत्र आदि की ओर से काठमांडू में संयुक्त पत्रकार सम्मेलन करते हुए चेतावनी दी गई है कि अगर विज्ञापन रद्द नहीं की जाएगी तो संघर्ष समिति देशव्यापी आन्दोलन करने के लिए बाध्य हो जाएगी ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए आदिवासी नेता सुरेश आले मगर ने कहा है कि विज्ञापन समावेशी सिद्धान्त के विरुद्ध आया है, इसीलिए इसको रद्द करना चाहिए । उन्होंने आगे कहा– ‘अगर रद्द नहीं की जाएगी तो कड़ा आन्दोलन शुरु होनेवाला है ।’ आदिवासी जनजाति महासंघ के उपाध्यक्ष गोविन्द छन्त्याल ने कहा कि विज्ञापन विभेदपूर्ण है, संविधान की मर्म और भावना को उल्लंघन की गई है । राष्ट्रीय अपांग महासंघ के अध्यक्ष मित्रलाल शर्मा को कहना है कि विज्ञापन रद्द नहीं की जाएगी तो सड़क बंद करते हुए आन्दोलन की जाएगी ।
पूर्व सभासद कौशर साह ने कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए कहा कि सरकार संविधान विरोधी क्रियाकलाप में संलग्न है । उनका मानना है कि आदिवासी, जनजाति और मधेशी के ऊपर हो रहे विभेद आज भी कायम है, इसीलिए आन्दोलन की विकल्प नहीं है । वक्ताओं ने कहा है कि जारी विज्ञापन रद्द कर पुनः समावेशी सिद्धान्त के अनुसार नयां विज्ञापन प्रकाशित करना चाहिए ।

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