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बिहार सहरसा जिले में अवस्थित सूर्य मंदिर, अद्भुत और चमत्कारी

 

१० जुलाई

भारत के  बिहार राज्य का एक जिला है सहरसा  जहाँ  एक छोटा सा गांव कन्दाहा है। परन्तु इस गाँव को भारत के एक प्राचीनतम और अनुपम सुर्य मंदिर के स्वामित्व का गौरव प्राप्त है। इस अतुलनीय सूर्य मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में मिथिला के राजा हरिसिंह देव ने किया था। यह सहरसा जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर पश्चिम में अवस्थित है। महाभारत और सूर्य पुराण के अनुसार इस  सुर्य मंदिर का निर्माण ‘द्वापर युग’ में हो चुका था। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र  ‘शाम्ब’ किसी त्वचा रोग से पीड़ित थे जो मात्र यहाँ के सूर्य कूप के जल से ठीक हो सकती थी। यह पवित्र सूर्य कूप अभी भी मंदिर के निकट अवस्थित है. इस के पवित्र जल से अभी भी त्वचा रोगों के ठीक होने की बात बताई जाती है।

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यह सूर्य मंदिर सूर्य देव की प्रतिमा के कारण भी अद्भुत माना जाता है। मंदिर के गर्भ गृह में सूर्य देव विशाल प्रतिमा है, जिसे इस इलाके में ‘ बाबा भावादित्य’ के नाम से जाना जाता है। प्रतिमा में सूर्य देव की दोनों पत्नियों को दर्शाया गया है।साथ ही 7 घोड़े और 14 लगाम के रथ को भी दर्शाया गया है। इस प्रतिमा की एक विशेषता यह भी है की यह बहुत ही मुलायम काले पत्थर से बनी है। यह विशेषता तो कोणार्क एवं देव के सूर्य मंदिरों में भी देखने को नहीं मिलती है। परन्तु सबसे अद्भुत एवं रहस्यमयी है मंदिर के चौखट पर उत्कीर्ण लिपि जो अभी तक नहीं पढ़ी जा सकी है।

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परन्तु दुर्भाग्य से यह प्रतिमा भी औरंगजेब काल में अन्य अनेक हिन्दू मंदिरों की तरह ही छतिग्रस्त कर दिया गया। इसी कारण से प्रतिमा का बाया हाथ , नाक और जनेऊ का ठीक प्रकार से पता नहीं चल पाता है।इस प्रतिमा के अन्य अनेक भागों को भी औरंगजेब काल में ही तोड़ कर निकट के सूर्य कूप में फेक दिया गया था, जो 1985 में सूर्य कूप की खुदाई के बाद मिला है।

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अफसोस इस बात का है की इतने प्राचीन काल के और एतिहासिक महत्व के इस मंदिर को उपेक्षित रखा गया है और पर्यटन स्थल के रूप में इसका विकास नहीं हो सका है।
आभार:- वॉयस फॉर मिथिला

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