पाकिस्तान ने भारत के लिए अपना हवाई रुट खाेला
भारत के कड़े रुख, अमेरिकी दबाव और 10 करोड़ डॉलर (6.8 अरब रुपये) का नुकसान उठाने के बाद आखिरकार पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया है। बालाकोट एयरस्ट्राइक होने के करीब साढ़े चार महीने बाद पाकिस्तान ने मुल्क भारत के लिए अपना हवाई क्षेत्र खोल दिया है। इस फैसले के बाद भारत ने राहत की सांस ली है।पुलवामा में जैश-ए -मुहम्मद द्वारा आतंकी हमला किया गया था। इस हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान मारे गए थे। इसका बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र पर हवाई हमला किया था, जिसके बाद पाकिस्तान-भारत ने अपने-अपने हवाई क्षेत्र में एक दूसरे के विमानों के उड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
पहले से ही अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था से बेहाल पाकिस्तान को यह सौदा बड़ा महंगा पड़ा। प्रतिबंध के चलते रोजाना करीब चार सौ फ्लाइट प्रभावित हुई, जिसकी वजह से पाकिस्तान को करीब 10 करोड़ डॉलर यानी 6.8 अरब रुपये का नुकसान हुआ।
पाकिस्तान हवाई क्षेत्र से रोजाना चार सौ पैसेंजर फ्लाइट गुजरती थी, जिससे प्रतिदिन उसे तीन लाख डॉलर की आय होती थी। इसके अलावा, पाकिस्तान के विमानन क्षेत्र की दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया तक पहुंचने के लिए बड़ी मांग है। कुआलालंपुर और बैंकॉक जैसी जगहों के लिए उड़ानों के रूप में भारतीय हवाई क्षेत्र को बंद करने के कारण पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को प्रति दिन 4.5 लाख डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ता जा रहा था। अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने तेहरान और उसके समुद्री क्षेत्र के ऊपर से विमानों को उड़ान न भरने की सलाह दी है। पाक हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित होने के बाद भारत के विमान सेंट्रल एशिया और यूरोप जाने के लिए इसी रूट का इस्तेमाल कर रहे थे। इसलिए अमेरिका ने पाकिस्तान हवाई क्षेत्र को भारत के लिए खोलने में भूमिका अदा की है।नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने संसद को बताया कि भारत को रूट डायवर्जन के कारण 430 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। 3 जुलाई को पुरी ने राज्यसभा को बताया था कि पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने से भारत को कुल नुकसान लगभग 550 करोड़ रुपये (एयर इंडिया को 491 करोड़ रुपये, स्पाइस जेट को 30.73 करोड़ रुपये, इंडिगो को 25.1 करोड़ रुपये और 2.1 करोड़ रुपये) उठाना पड़ा।

