कर्मचारी नेपाल सरकार मातहत, लेकिन पारिश्रमिक लेते हैं भारत सरकार से !
काठमांडू, २ अगस्त । आप को यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि नेपाल सरकार मातहत रहनेवाले कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जो भारत सरकार की ओर से मासिक पारिश्रमिक एवं सेवा–सुविधा लेते हैं । हां, यह सच है । आज प्रकाशित कान्तिपुर दैनिक में यह समाचार है ।
समाचार अनुसार हर साल चर्चा में आनेवाली कोसी और गण्डक योजना के लिए नेपाल सरकार ने लगभग २ दर्जन कर्मचारी भर्ती की है । इस परियोजना के लिए नेपाल सरकार से नियुक्त दो सम्पर्क अधिकृत (लियाजन–अफिसर) सहित सभी नेपाली कर्मचारी बिहार राज्य सरकार से नियमित पारिश्रमिक लेते आ रहे हैं, जो कर्मचारी के लिए भी असहज हो रहा है ।
इसलिए कोसी आयोजना के सम्पर्क एकं भुआर्जन अधिकृत (लियाजन अफिसर) सन्तोषकुमार चोङवाङ काठमांडू आए हैं । उनका कहना है कि कोशी–गण्डक सम्झौता के अनुसार ही भारत की ओर से उल्लेखित सुविधा मिल रही है । लेकिन वह आगे कहते हैं– ‘अपनी राष्ट्र की हकहित के लिए काम करना है, लेकिन भारत सरकार की ओर से पारिश्रमिक ले रहे हैं, यह सहज और स्वीकार्य परिस्थिति नहीं है । इसके लिए जो भी आर्थिक भार पड़ता है, वह नेपाल सरकार को ही लेना चाहिए, यही कहने के लिए मैं काठमांडू आया हूँ ।’
चोङवाङ के साथ गण्डक परियोजना के लियाजन अफिसर तारा सिंह भी आए हैं । उन लोगों ने ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिचाई मन्त्रालय में जाकर अपनी शिकायत दर्ज की है ।

