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अगले कुछ घंटे चन्द्रयान 2 के लिए कठिनाई भरे

 

घड़ी की सुइयां जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हैं, सवा अरब भारतीयों की धड़कनें भी तेज होती जा रही हैं। करीब डेढ़ महीने पहले चांद के सफर पर निकले चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ इतिहास रचने से कुछ ही घंटे की दूरी पर है। शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच लैंडर चांद पर उतरेगा। भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की निगाहें इस उपलब्धि का गवाह बनने का इंतजार कर रही हैं। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है।

22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-2 को प्रक्षेपित किया गया था। इसका प्रक्षेपण इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 की मदद से हुआ था। फिलहाल लैंडिंग से पहले के सभी अहम पड़ाव पार हो चुके हैं। दो सितंबर को यान के ऑर्बिटर से लैंडर को अलग किया गया था। इसके बाद तीन और चार सितंबर को इसकी कक्षा को कम (डी-ऑर्बिटिंग) करते हुए इसे चांद के नजदीक पहुंचाया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन के शब्दों में कहें तो अब इस पूरे अभियान का सबसे मुश्किल पल आने वाला है। यह पल इसलिए भी जटिल है, क्योंकि इसरो ने अब तक अंतरिक्ष में सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कराई है।

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अभी क्या-क्या होना बाकी?

छह-सात सितंबर की दरम्यानी रात एक से दो बजे के बीच लैंडर को चांद पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसरो प्रमुख सिवन का कहना है कि लैंडर चांद पर कुछ उसी तरह उतरेगा, जैसे साइंस फिक्शन फिल्मों में उड़न तश्तरियों को उतरते हुए दिखाया जाता है। लैंडर पर लगे कैमरे की मदद से उसका कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर खुद यह तय करेगा कि ठीक किस जगह पर उतरना है। लैंडर के उतरने के चार घंटे बाद रोवर ‘प्रज्ञान’ भी उससे बाहर निकल जाएगा।

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हर मन में बस चंद्रयान

इसरो के वैज्ञानिकों की आंखों से मानों नींद कहीं गायब हो गई है। कोई कुछ बोल नहीं रहा है, लेकिन हर मन में बस चंद्रयान-2 से जुड़ी बातें ही हैं। अभियान से जुड़े इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हर व्यक्ति के दिमाग में यही है कि चंद्रयान-2 और उसके लैंडर पर क्या चल रहा है। आइए इसकी सफल लैंडिंग की प्रार्थना करते हैं।’ वैज्ञानिकों ने 100 फीसद सफल लैंडिंग का भरोसा भी जताया है।

छात्रों संग लैंडिंग देखेंगे पीएम मोदी

इस ऐतिहासिक उपलब्धि का गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बेंगलुरु में इसरो के मुख्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान देशभर से करीब 60 से 70 छात्र भी उनके साथ इस पल का गवाह बनेंगे। अलग-अलग राज्यों इन छात्रों को प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया है।

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चांद पर मानवों के बसने का खुलेगा रास्ता

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्षयात्री जेरी लिनेंजर का कहना है कि भारत का यह चंद्र अभियान केवल उसकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षमता ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि इससे चांद पर मानवों के बसने का रास्ता भी खुलेगा। चंद्रयान-2 यहां पानी की पुष्टि करेगा। अगर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी हुआ तो मानव अभियानों के लिए वह क्षेत्र काफी उपयुक्त हो सकता है। लिनेंजर नेशनल जियोग्राफिक चैनल द्वारा चंद्रयान-2 की लैंडिंग के सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में हिस्सा लेने भारत आए हैं।

साभार दैनिक जागरण से

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