किसी की नजरों में मेरे लिए भी हो ढेर सारा प्यार इंतजार आज भी है : निशा अग्रवाल
आती जाती सांसों का
एहसास है जिंदगी
जो ये नही, तो कहाँ
पास है जिंदगी।
ये ही सांसें गर
काम आए किसी के तो
खास है जिंदगी।
जो सांस सांस पे लिखा हो
मेरे श्याम का नाम, तो
नरगिसी सुवास है जिंदगी।
जिंदा हों हम
पर चलती हो किसी और के लिए
तो एकादशी का
उपवास है जिंदगी।
जो चुन लेते हैं कटंक
गैरों के हिस्से के
करके रक्त-रंजित हथेलियां अपनी
एक उनकी बस उनकी
उजास है जिंदगी।
और कूछ नही
सुगंधित कुछ सांसों का
हिसाब है जिंदगी।।
जय माँ शैलपुत्री
पूजते हैं क्यों दुर्गा को
क्योंकि शक्ति उनमें सन्निहित है
नारी तो वो भी हैं
फिर क्युं वो महिमामंडित है।
अंश तुम भी उसी का हो
तुममें भी शक्ति वो ही है
भावनाओं के भँवर में क्युं
तुम खुद को बिसरे बैठी हो।
भय किसका है तुमको
किसने तुमको रोका है
निज अस्तित्व निज हाथों से
क्युं तुम बिखेरे बैठी हो।
सच्चाई औ आत्मबल की
ले हाथों में तुम कृपाण
मार्ग प्रशस्त करो अपना
कर लो मुठ्ठी में जहान।
नवरात्र का ये पावन पर्व
नारी के विजय की गाथा कहता है।
हर रुप में तु ही पूजित है
तुझसे ही तो आशीष का झरना बहता है।
कौन तुझे कुछ दे सकता है
अन्नपूर्णा, लक्ष्मी, सरस्वती तु ही तो है।
हाथ मत फैला अपने अतंर को जगा
आंरभ हो या हो अंत, तु ही तो है।
केवल तु इक देह नही
न वस्तु कोई भोग की
तु हरि का प्रसाद है
औषध है हर रोग की
जबतक तु खुद को पहचानेगी नही
कोई तुझे क्युं देगा पहचान
पैर भी तेरे जमीं भी तेरी
पंख भी तेरे आस्मां भी तेरा
भर ले मनचाही उड़ान
भर ले मनचाही उड़ान।।।।।
निशा अग्रवाल
धरान
इंतजार आज भी है।
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निशा अग्रवाल
धरान
किसी की नजरों में
मेरे लिए भी हो
ढेर सारा प्यार
इंतजार आज भी है
मदहोश उन निगाहों का
करने को दीदार
मेरी नजरें
बेकरार आज भी हैं।
कुछ मद्धम से तीव्र
जब हवा गुजरती है
तो लगता है युं कि मौसमों पे वो
खुमार आज भी है।
मूंदे पलकों को बैठी
किसी दरख्त के नीचे
हाथों में वो फूल लिए, जिसपे
बहार आज भी है।
तु आ न आ
मर्जी फ़ख्त तुम्हारी है
आरजुओं की चिता में
जल रहें हैं हम, जिनमें
अंगार आज भी हैं।
ना मिले दो बदन
तो हर्ज क्या है
रूह से रूह के मिलने के
आसार आज भी हैं।
तभी तो
इंतजार आज भी है।।।।

