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पिपरा पहुँचकर हिन्दी में भाषण

 

महोत्तरी, २१ नवम्बर । सामान्यतः पहाडी समुदाय के नेता हिन्दी को विदेशी भाषा मानते हैं और इसको संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए हिचकते हैं । लेकिन व्यवहारिक तौर पर अगर वे लोग तराई–मधेश में जाते हैं तो हिन्दी भाषा उनके लिए संपर्क भाषा बन जाती है । यही दृश्य देखने को मिला बुधबार महोत्तरी जिला स्थित पिपरा गांवपालिका में ।
हां, मार्गशीर्ष १४ गते देश के विभिन्न स्थानीय निकायों में उप–चुनाव हो रही है, उसमें से एक है पिपरा गांवपालिका भी, जहां गांवपालिका अध्यक्ष पद के लिए मतदान हो रही है और विभिन्न पार्टी के शीर्ष नेता वोट मांगने के लिए पहुँचे हैं । ऐसी ही क्रम में बुधबार नेपाली कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ शीर्ष नेता पिपरा पहुँच गए थे । दो अलग–अलग चुनावी सभा में उन लोगों ने मतदाताओं से हिन्दी भाषा तो प्रयोग किया ही, साथ में अपने पूरा भाषण भी हिन्दी में ही की
हां, पिपरा बाजार में चुनावी सभा आयोजित था, समाजवादी पार्टी के संघीय परिषद् अध्यक्ष एवं पूर्वप्रधानमन्त्री सम्बोधन कर रहे थे । उसके करीबी दूरी पर ही नेपाली कांग्रेस ने भी चुनावी सभा का आयोजन किया था, जहां नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता विश्वप्रकाश शर्मा तथा पार्टी उपसभापति विमलेन्द्र निधि सम्बोधन कर रहे थे । डा. भट्टराई और शर्मा दोनों ने हिन्दी भाषा में ही अपनी बात मतदाताओं के साथ रखे । कांग्रेस प्रवक्ता शर्मा ने तो शुरु से अन्त तक ही हिन्दी में सम्बोधन किया । लेकिन कार्यक्रम में सहभागी कांग्रेस उप–सभापति विमलेन्द्र निधि, समाजवादी पार्टी के प्रदेश मन्त्री तथा सांसदों ने मैथिली भाषा में कार्यक्रम को सम्बोधन किया था ।
सम्बोधन के दौरान दोनों दल के नेताओं ने विपक्षी पार्टी के नेताओं को दोषारोपण कर भाषणबाजी किया । कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा कि नेकपा के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल दिन में चार बार लभ करते हैं । उन्होंने आगे कहा– ‘प्रचण्ड जी जहां जाते हैं, वही उनका लभ पड़ जाता है । मधेश में जाते हैं तो मधेश के साथ लभ, पहाड में जाते हैं तो पहाड के साथ ।’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली संघीयता को अस्वीकार करनेवाले व्यक्तियों में से हैं, लेकिन बाध्यतावस स्वीकार कर रहे हैं ।
इधर कांग्रेस प्रवक्त विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी शुरु से ही संविधान संशोधन की बात कर रही थी, लेकिन सत्ता मिलने के बाद वह अभी चुप है । उनका मानना है कि समाजवादी पार्टी के लिए संविधान संशोधन का मुद्दा सत्ता में जाने के लिए वार्गेनिङ प्वाइन्ट है । नेता शर्मा ने डा. बाबुराम भट्टराई की ओर संकेत करते हुए कहा कि ४० साल तक कम्युनिष्ट पार्टी में रहकर हजारों की जान लेनेवाले व्यक्ति आज इतिहास को अनदेखा कर खूद ही बड़े नेता मान रहे हैं ।

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