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कश्मीर 370 और आज : योगेश मोहनजी गुप्ता

नवम्बर माह की दिनांक 28 को मैं चार दिन की कश्मीर यात्रा पर गया था। मैंने अपनी कश्मीर यात्रा के दौरान वहाँ की जनता से मुलाकात और वहाँ भ्रमण के दौरान जो कुछ भी महसूस किया, उसे आप सभी के मध्य निष्पक्ष रूप में पेश करना चाहता हूँ।

कश्मीर का नाम जब दिमाग में आता है, तब भगवान शिव और माँ दुर्गा का स्वरूप अचानक ही आँखों में आ जाता है, क्योंकि उस पवित्र भूमि में उनका निवास है। वास्तव में देखा जाए तो ईश्वर या खुदा ने कश्मीर को, जो नियामतें बरती है, वह सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी नहीं है। वहाँ की केसर की सुगंध पूरे वातावरण को महका देती है। वहाँ के हर पौधे में जीवनदायिनी शक्तियाँ मौजूद है, वहाँ की मिट्टी में अनेको खनिज प्रचुर मात्रा में है, जलवायु ऐसी है कि यदि व्यक्ति पूरे दिन बिना खाए केवल वायु का ही सेवन करे तो स्वस्थ व तंदरुस्त रह सकता है। यह भी मान्यता है कि जगदगुरू शंकराचार्य जी अपनी भारत यात्रा के दौरान यहाँ आए थे और यही वो पावन स्थल है, जहाँ जगदगुरू शंकराचार्य जी भगवान शिव की साधना की थी।

भगवान शिव का यह शंकराचार्य मंदिर कश्मीर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है।
मुझे कश्मीर की जनता से बहुत नजदीक से मिलने का मौका मिला और यह पाया कि वहाँ के बारे में अनेकों माध्यमों द्वारा जो कुछ कहा-सुना जाता है, वह प्रदेश वैसा बिल्कुल नहीं है। वे लोग सुन्दर, हंसमुख, हष्ट-पुष्ट और अत्यधिक स्नेही हैं। वे लोग एक पत्नी, संयुक्त और छोटे परिवार में विश्वास रखते हैं। उनके यहाँ अन्य जगहों के हिन्दुओं के परिवारों से भी ज्यादा धार्मिकता एवं संस्कार दिखाई देते हैं, जैसे – वे अपने घर में चमड़ों के जूतें व चप्पलों को आने नहीं देते हैं और मेहमान नवाज़ी में उनकी महिलाएँ बढ़-चढ़कर रूचि दिखाती है। अधिकांश घरों में परदे का प्रयोग नहीं होता और उनकी महिलाएँ खुलकर मेहमानों की आवभगत करती हैं और उनसे बातें करके अपने एवं मेहमान के विषय में वह जानने को हृदय से आतुर रहती हैं। उनके बच्चे बहुत सलीकेवान और मेहनती हैं। महिलाएँ घर की सजावट एवं पौष्टिक भोजन बनाने में विशेष रूचि रखती हैं। कहवा कश्मीर का एक पौष्टिक पेय पदार्थ है जो वे हर मेहमान को गर्व से पेश करती हैं,। लगभग हर कश्मीरी अपना स्थायी घर बनाने में रूचि रखता है।

धारा 370 पर वे खुलकर बोलते हैं कि वह रहें या ना रहें, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अधिकतर कश्मीरियों को सभी पार्टियों के राजनेताओं से उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई उम्मीद नहीं है। उनका यह मानना है कि इन राजनेताओं ने कश्मीर की जनता को अपने लालच के लिए इस्तेमाल किया है और वहाँ की जनता के अरबों रूपयों को एकत्रित कर अपने महल कश्मीर अथवा विदेशों में बनाए तथा करोड़ो रूपये खर्च अपने बच्चों को पढ़ने व मौज-मस्ती करने के लिए विदेशों में भेजा है। उनकी भारत के प्रति वफादारी पर जब प्रश्नचिह्न लगता है तो, वह उनकी अंतरात्मा को झकझोर देता है, जब उनको गद्दार कहा जाता है तो उनको गुस्सा आता है। सच्चाई यह है कि वे देश द्रोही ना तो कभी थे और ना ही कभी हो सकते हैं। पाकिस्तान ने आतंकवादियों को भेजकर और उनको डरा कर, उनकी मजबूरी का लाभ उठाया क्योंकि पिछली सरकार पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रखती थी। पिछले कई वर्षों से उनको बेवजह उत्पीड़ित किया गया, उससे उनमें गुस्सा फूटा। उनके बच्चों की समय-समय पर तलाशी ली जाती रही है, जिससे उनको चोट पहुँचती हैं। बेवजह उनके घरों की तलाशी पिछली सरकारों द्वारा ली जाती रही है, उससे भी वे अत्यधिक आहत हैं। यह उसी प्रकार है कि जैसे एक मासूम बच्चें को एक क्रूर मास्टर मार-मार कर पढ़ाना चाहता है और उसको जिद्दी बना देता है और यह पिछले कई वर्षों से होता रहा है।

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आज अधिकांश कश्मीरी मोदी जी के प्रशसंक हैं तथा उम्मीद करते हैं कि ऐसी परिस्थिति में उनके सिरपर कोई प्यार का हाथ रखकर उनको आश्वासन देगा कि, कश्मीर का विकास होगा, सड़के चैड़ी, जाम से मुक्ति, ऐलीवेटेड रोड बनेगी और वहाँ घूमने के लिए बहुतायत में पर्यटक आयेगें, जिससे उनका रोजगार बढ़ेगा। कश्मीर के अतीत पर यदि निगाह डालें तो यह पायेंगे कि किसी भी कश्मीरी ने कभी किसी पर्यटक को उत्पीड़ित नहीं किया। ऐसा भी समय आया था जब श्रीनगर में इतने पर्यटक पहुँच गए कि सारे होटल व लाॅज भर गए थे, तब वहाँ के नागरिकों ने पर्यटको को अपने घर में पनाह दी, उनको प्यार से खिलाया, घुमाया और उनकी सेवा की। कश्मीरी अपने अतिथियों की सेवा करना अपना धार्मिक दायित्व मानते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि वे हिन्दुस्तान के साथ या पाकिस्तान के साथ रहना पसंद करेंगे, तब उन्होंने बेबाक होकर कहा कि वो हमेशा से ही हिन्दुस्तान के साथ रहना चाहते हैं। वे कहते हैं कि उनकी आबादी लगभग 70 लाख है और उन्हें जो सुविधा हिन्दुस्तान के साथ रहकर मिल सकती हैं, वह पाकिस्तान के साथ कभी नहीं मिल सकती। भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है और पाकिस्तान की 28 करोड़ है। भारत पाकिस्तान की तुलना में अधिक संतुलित देश है, अतः उनका व्यापार भी भारत के साथ ही सुरक्षित है इसलिए वे भारत के साथ ही रहना चाहते हैं। परन्तु भारत के नेतृत्व एवं सम्पूर्ण जनता से उनकी अपेक्षा केवल प्यार प्राप्त करने की है, भारत की सरकार उनको कुशल नर्स की तरह देखभाल करें, उनको दिल से गले लगाए। आनन्द का विषय यह है कि कश्मीरी जनता महिलाओं को इतना अधिक सम्मान देती है कि श्री नगर में रात 12 बजे भी कोई अकेली महिला पहुँच जाए ता,े वहाँ उस महिला की ओर आँख उठाकर कोई नहीं देखेगा। यही कारण है कि श्रीनगर की अधिकांश महिलाएं बिना परदे के, या बिना किसी को साथ लिए अकेले ही बाजारों में घूमती है, खरीदारी करती हैं वहाँ की लड़कियाँ छोटे-बड़े संस्थानों में बेझिझक कार्य करती मिलती है।

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वहाँ अपराध की मात्रा जीरो प्रतिशत है। वहाँ की जनता नेताओं से कोई अपेक्षा ना रखकर केवल मात्र मोदी जी से अपेक्षा रखती हैं कि वे उनसे सीधे संवाद करेंगे, उनकी परेशानियों को समझ कर हल करेंगे।

अधिकांश कश्मीरियों का रोजगार पश्मीने की कढ़ाई करना है। पश्मीना की कढ़ाई कश्मीर की शान है और पूरे विश्व में यहाँ के कारीगरों का कोई तोड़ नहीं है। एक अंगूठी में पूरी चादर को निकालना अचम्भित करने वाला कार्य है, परन्तु यह कारीगिरी कश्मीर से लुप्त होती जा रही है। एक पश्मीना शाल बनाने में 8 से 10 महीने लगते हैं और उसके कारिगरों इतना शोषण होता है कि उसको 6 से 8 हजार रूपये प्रतिमाह से ज्यादा धनराशी प्राप्त नहीं होती। आज सरकार का दायित्व बनता है कि इस हुनर को जिन्दा रखने के लिए इसका वितरण अपने हाथ में लें, जिससे इनको सही दाम मिले और ग्राहको को धोखा ना मिले जिससे यह कला कश्मीर से लुप्त होने से बचाई जा सके।

अधिकांश कश्मीरियों को हर समय किसी अनहोनी का भय रहता है। इसलिए एक छोटी सी अफवाह पर, वे अपने प्रतिष्ठान एकदम बंदकर देते हैं। अफवाहों की स्थिति इतनी भयानक है कि शायद कोई दिन ऐसा होगा, जब बाजार पूरे समय के लिए खुलते होगें। अधिकांश दिनों में बाजार 1-2 घंटे में ही बंद हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि वहाँ शरारती तत्व नहीं है, परन्तु वो उतने ही हैं जितने भारत के किसी अन्य शहर अथवा प्रदेश में हैं। परन्तु यहाँ कि सरकारे उनको चिन्हित करके दंड नहीं देती है अपितु सामूहिक दंड देती है, जिससे जनता में विरोध की ज्वाला भड़कती रहती है। मोदी जी ने धारा 370 हटाकर एक बहुत ही प्रशंसनीय कार्य किया। और इसको सफल बनाने के लिए उन्हें एक भी गोली नहीं चलानी पड़ी, क्योंकि जैसे पहले लिखा जा चुका है कि धारा 370 हटने से आज कश्मीरी जनता को कोई फर्क नहीं पड़ा। आज कश्मीरी जनता चाहती है कि वे भी और प्रदेशों के समान गुजर बसर करें, विद्यालय नियमित खुलें और सुचारू रूप से अध्यापन कार्य हो। लेखक को श्रीनगर विश्वविद्यालय की बायोटेक लैब और फार्मेसी लैब देखने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसमें छात्रों को पढ़ने की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, परन्तु पिछली सरकारों ने जो विरोध के बीज बोए है उसके फलस्वरूप वहाँ सुचारू रूप से अध्यापन कार्य नहीं हो पा रहा है। वहाँ के छात्र अध्ययन करके देश का नाम ऊँचा करना चाहते हैं। उसका दिमाग बहुत तीव्र है। वे किसी भी परीक्षा में अव्वल आने की ललक रखते हैं और अपने प्रदेश एवं देश का नाम ऊँचा करने में उनको गर्व प्राप्त होगा। ऐसे बहुत से उदाहरण है कि जहाँ कश्मीर के छात्रों ने एलाइट सर्विस में पहुँचने के बाद अपनी देशभक्ति को प्रमाणित किया है।

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कश्मीर में कुछ विशेष जड़ी-बूटियों का प्रचुर मात्रा में भण्डार है, जो पूरे विश्व में सिर्फ इसी क्षेत्र में पाई जाती है। उनपर गहन खोज एवं शोध करने का बहुत बड़ा क्षेत्र है। यदि कश्मीर में इस तथ्य पर पूर्ण ध्यान दिया जाए तो, कश्मीर में उपलब्ध दुर्लभ जड़ी-बूटियों में इतनी क्षमता है कि लोगों की असाध्य बिमारियों का इलाज कर भारत की जनता को निरोगी किया जा सकता है।
‘कश्मीर धरती का स्वर्ग है और भविष्य में भी स्वर्ग रहेगा‘, इस स्वप्न को साकार करने के लिए ईमानदार, राजनीतिक इच्छाशक्ति से युक्त नेतागणों की आवश्कता है, वे आशा की किरण आज केवल मात्र मोदी सरकार में हैं।

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