Sat. Aug 15th, 2020

मोक्षदा एकादशी के ही दिन श्रीकृष्ण ने दिया था गीता का उपदेश

Image result for image of shree krishna maha virat swroop"

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह 08 दिसंबर दिन रविवार को है। मोक्षदा एकादशी को मानस रोग निवरिणी एकादशी, मोक्षदायिनी एकादशी, मोहनाशक एकादशी, शुद्धा एकादशी आदि नामों से जाना जाता है। मोक्षदा एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। व्रत रखने से सभी मानसिक रोग और कष्ट मिटते हैं, सभी पाप नष्ट होते हैं। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ही श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था, इसलिए हर वर्ष इस तिथि को गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन लोग गीता जयंती का व्रत भी रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं।Image result for image of shree krishna maha virat swroop"

यह भी पढें   भगवान श्रीकृष्ण विष्णु के पूर्णावतार, किसने रखा था उनका कृष्ण नाम ?

मोक्षदा एकादशी का महत्व

मोह-माया ही सभी रोगों की जड़ है। इससे ही मनुष्य के अंदर कई प्रकार की बीमारियां पैदा होती हैं। मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से कई तर​ह के मानसिक रोग दूर होते हैं। पद्म पुराण में बताया गया है कि मोक्षदा एकादशी पापों का नाश करने वाली है।

मोक्षदा एकादशी व्रत मुहूर्त

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 07 दिसंबर दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 34 मिनट पर हो रहा है, जो 08 दिसंबर दिन रविवार को सुबह 08 बजकर 29 मिनट तक है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद होता है। ऐसे में मोक्षदा एकादशी का व्रत 08 दिसंबर रविवार को रखा जाएगा और पारण 09 दिसंबर दिन सोमवार को होगा।

यह भी पढें   वाइरस और भाइरल दोनों से बचेंः कलाकार दीपकराज गिरी

पारण का समय

मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए पारण का समय 09 दिसंबर दिन सोमवार को सुबह 07 बजकर 02 मिनट से सुबह 09 बजकर 07 मिनट तक है। पारण द्वादशी का समापन 09 बजकर 54 मिनट पर है।

मोक्षदा एकादशी व्रत विधि

एकादशी के दिन प्रात:काल में उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत हो जाएं। इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब मोक्षदा एकादशी व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसके बाद उनकी विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें।

यह भी पढें   ओली–प्रचण्ड वार्ता को आज भी मिली निरन्तरता

इस दिन गीता जयंती के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की भी विधि विधान से पूजा करें। आज के दिन श्रीमदभगवत् गीता का पाठ करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी करने से व्यक्ति सांसारिक मो​ह माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: