Thu. Apr 2nd, 2020

तीन पुस्तकों आँधी की उम्र नहीं होती, खिचड़ी सोङ्ग तथा बाल कविता संग्रह का भव्य विमोचन

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जलेश्वर | आज मिति 2076 रविवार के दिन नेपाल के प्रदेश नंबर दो राजधानी जनकपुर से 15 किमी दक्षिण जलेश्वर नगरपालिका के पत्रकार महासंघ के सभाकक्ष में तीन पुस्तको का बिमोचन हुआ। इस कार्यक्रम के अध्यक्षता सुविख्यात साहित्यकार तथा जिला ज्येष्ठ नागरिक संघ के अध्यक्ष, आज के प्रमुख रचना “आँधी की उम्र नहीं होती” नामक हिंदी उपन्यास के रचैता श्री महेश्वर राय जी थें। प्रमुख अतिथि के रुपमे राज्य मंत्री श्री अभिराम शर्मा जी थें तो वही अति विशिष्ट अतिथि के रुपमे राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के उप कुलपति आदरणीय डा. भरत झा जी थें। इसी प्रकार श्री महेन्द्र प्रसाद यादव, जलेश्वर के मेयर श्री राम शं कर मिश्रा, मटिहानी के मेयर श्री हरिनारायण मंडल, वरिष्ठ पत्रकार श्री कुँवर कान्त पाठक, श्री राजकिशोर झा, श्री राजेश्वर नेपाली, श्री चंदेश्वर रौनियार, श्री जयकांत झा, श्री श्रीकांत झा, श्री बीरेन्द्र कुमार मिश्रा, श्री राजेश्वर ठाकुर, प्रा.श्री ध्रुब राय, श्री दिनेस प्रसाद यादव, श्री नरेन्द्रलाल कर्ण, लगायत के सैकडों प्राज्ञों की अदभुत उपस्थिति रही।

श्री सीताराम उपाध्याय जी मुखारविंद से स्वस्ति वाचन तथा श्री चंद्रभूषण जी द्वारा गाए गए गणपति और सरश्वती वंदना के वाद कार्यक्रम ने गती पकड़ा। स्वागत मंतव्य के वाद माननीय राज्य मन्त्री श्री अभिराम शर्मा जी तथा उपकुलपति श्री भारत झा को ज्येष्ठ नागरिक संघ की ओर से विशेष अभिनन्दन किया गया।विमोचन के क्रम में श्री महेश्वर राय जी द्वारा रचित (आँधी की उम्र नहीं होती) उपन्यास, श्री राज किशोर झा जी द्वारा रचित (खिचड़ी सोङ्ग) बहुभाषिक कविता संग्रह, तथा शिक्षक अजय कुमार झा के निर्देशन में कक्षा 9 में अध्ययनरत 35 बाल साहित्यकारों के द्वारा रचित (बाल कविता संग्रह) का संयुक्त विमोचन हुआ। पुस्तकों की समीक्षा प्राध्यापक श्री ध्रुब राय और (कार्यक्रम के उद्घोषक) अजय कुमार झा के द्वारा किया गया। सभी वक्ताओं ने सामूहिक शुभकामना के साथ साथ बाल साहित्यकारों को विशेष रूपसे अभिप्रेरित करने का प्रयास किए।

कार्यक्रम हिंदी भाषा में संचालित किया गया। हिंदी हमारी अभिन्न भाषा है, सहोदरी भाषा है, हमारी पहचान की अभिव्यक्ति की भाषा है। ऐसा अध्यक्ष लगायत के विद्वतजनों का भाव था। इस कार्यक्रम की एक सबसे विशेष बात यह थी कि उपकुलपति डा.श्री भरत झा जी ने भड़ी सभा में अपने वाल्यावस्था के गुरु तथा आज के अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी को चरण स्पर्ष कर सबको अचंभित कर डाला। दोनों महा पुरुषों की नेत्रों से अश्रुधारा टपकने लगे। कुछ देर के लिए ऐसा लग रहा था; मानो हम त्रेतायुग में आ पहुंचे हैं। यही वह कार्यक्रम था जिसमे एक लोग भी सभाकक्ष से बिचमे बाहर नहीं गए। सभी वक्ताओं ने समय का पूरा ख्याल रख्खा। समाप्ति तक लोग उपस्थित रहे। अन्त में मैंने सभी के धैर्य और शालीनता को प्रणाम करने से खुदको नहीं रोक पाया। अध्यक्ष महोदय श्री महेश्वर राय जी के मंतव्य के साथ कार्यक्रम को विश्राम कर दिया गया।

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