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बडिकेदारः एक आस्था का केन्द्र

 

डोटी जिला स्थित धार्मिक पर्यटकीय स्थल ‘बडिकेदार’ सिर्फ नेपाल के लिए ही नहीं, सीमा क्षेत्र से जुड़े हुए भारतीयों के लिए भी एक आस्था का केन्द्र है । विशेषतः भारत उत्तर प्रदेश स्थित शहर लखिपुर, पलिया, बरेली, सहाजनपुर, खटिमा जैसे क्षेत्र से हजारों तीर्थयात्री यहां आते हैं । नेपाल के तराई क्षेत्र में रहनेवाले विशेषतः थारु समुदायों में ‘बडिकेदार’ लोकप्रिय है । समग्र में कहे तो यह एक आकर्षक धार्मिक पर्यटकीय स्थल है । बडिकेदार पहुँचने का मतलब सिर्फ धार्मिक यात्रा करना ही नहीं, प्राकृतिक सौन्दर्य से भी भरपूर मनोरंजन लेना होता है । यहां आने वाले लोग स्थानीय कला–संस्कृति से भी मनोरंजन प्राप्त कर सकते हैं । ऐसे अद्भुत क्षेत्र के बारे में कुछ चर्चा होना आवश्यक है । व्यक्तिगत यात्रा अनुभूति के साथ मैं इस जगह के बारे में कुछ चर्चा करना चाहता हूं ।
लगभग दो महीने पहले कुछ मित्रों के साथ बडिकेदार भ्रमण का अवसर मुझे भी प्राप्त हुआ था । हमारे साथ डोटी जिला के प्रमुख जिला अधिकारी से लेकर प्रहरी प्रमुख, सशस्त्र पुलिस प्रमुख, महिला सेल प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि, उद्योग व्यावसाय से जुडे हुए व्यक्तित्व आदि सहभागी थे । बडिकेदार दर्शन की खातिर हम लोग ३ हजार मीटर उचाई में पहुँचे थे, जहां पहुँचकर प्रायः हर आदमी अदभुत महसूस करता है, हम लोगों ने भी वही महसूस किया । यहां स्थित एक चोटी की सबसे उँचाई में गाय और बछड़ा (गाय की सन्तान) की एक मुर्ति है, उसके दर्शन करने के बाद हम लोगों ने डरते हुए एक ‘सेल्फी’ लिया । भौगोलिक बनावट के कारण यहां सेल्फी लेना भी मुश्किल होता है, डर लगता है ।

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यहां पहुँचते ही हम लोगों को पोखरा स्थित सराङ्कोट, ललितपुर स्थित फुल्चोकी डाडा, नगरकोट स्थित भ्यु टावर, मनकामना का केवलकार हो या काठमाडौं स्थित चन्द्रागिरि केवलकार, आदि क्षेत्र की याद आ सकती है । इन सारी जगहों की अपनी–अपनी विशेषता भी है । लेकिन बडिकेदार की उँचाई में पहुँचने के बाद मन में जो आनन्द खिल उठता है, वह शब्दों में वर्णन नहीं हो सकता । यहाँ से बझाङ जिला स्थित अपि हिमाल, सैपाल हिमाल ही नहीं, सुर्खेत स्थित समतल भूमि से लेकर कर्णाली प्रदेश की राजधानी भी दिखाई देती है । इतना ही नहीं, भारत उत्तर प्रदेश स्थित कई बाजार भी दिखाई देती है । इन सारे दृश्य को अवलोकन करने के बाद लगा कि जीवन में एक बार बडिकेदार तो पहुँचना ही चाहिए ।
सुदुरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमन्त्री त्रिलोचन भट्ट भी इस जगह में पहुँच चुके हैं । पहले–पहले यहां जाने के लिए पैदल यात्रा ही अनिवार्य था । लेकिन आज गाड़ी से भी यहां पहुँच सकते हैं । गाडी की सुविधा होने के कारण पहले की तुलना में यहां पहुँचनेवालों की संख्या दिन–प्रति दिन बढ़ रही है । स्थानीय सरकार से लेकर प्रदेश और केन्द्र सरकार की ओर से स्थानीय स्तर में की गई विकासमूलक कार्यों के कुछ नमूने भी यहां दिखाई पड़ते हंै । स्थानीय सड़क, खानेपानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, कृषि में आधुनिकीकरण जैसे यहां कई काम हो रहे हैं ।
बडिकेदार पहुँचनेवाले लोग कहते हैं कि बडिकेदार दर्शन करने से मन की इच्छा पूर्ति होती है । स्थानीय कथन के अनुसार तत्कालीन सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रमुख मोहन मल्ल को बडीकेदार का आशीर्वाद प्राप्त था । कहा जाता है कि सिर्फ मल्ल को ही नहीं, डोटी से निर्वाचित प्रतिनिधिसभा सदस्य प्रेमबहादुर आलेमगर को भी बडीकेदार का आशिर्वाद प्राप्त है । स्वयम् आलेमगर दावी करते हैं कि बडीकेदार ने ही उनको सपने में आकर चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए कहा था । इसतरह बडिकेदार ने उच्च स्तरीय राजनीतिक नेतृत्व का भी ध्यानाकर्षण किया है । बडिकेदार अकल्पनीय चोटी में निर्मित खाई में स्थित है । जिस वक्त हम लोग यहां पहुँचे थे, उस वक्त यहां युवा–युवतियों की संख्या ही अधिक थी ।

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स्थानीयवासी में प्रचलित किम्बदन्ती के अनुसार परापूर्व काल में ‘लाना’ गांव निवासी एक किसान के घर की गाय दूध नहीं दे रही थी । कारण खोज करने पर एक दिन किसान को पता चला कि गाय एक शिला (पत्थर) के ऊपर दूध दे रही थी । उसके बाद गांव के ब्राह्मण लोगों ने कहां कि यहां कोई ना कोई दैवीय शक्ति हैं, इसीलिए गाय दूध दे रही है । उसी विश्वास के आधार पर स्थानीय लोग वहां पूजा करने लगे । उसी समय से यहां मेला लगना शुरु हुआ है । जनविश्वास है कि बडिकेदार का दर्शन करने से नौकरी करनेवालों को बढोत्तरी मिलती है और निःसन्तान को सन्तान प्राप्त होती है ।
जनविश्वास जो भी हो, लेकिन यहां की भौगोलिक बनावट लोगों को भाती है । प्राकृतिक सौन्दर्य की दृष्टिकोण से भी बडिकेदार घूमने के लिए आकर्षक स्थल है । यहां स्थित विभिन्न समुदायों का धामी नाच, मगर जाति का मारुनी नाच, सुदूर–पश्चिम क्षेत्र की चर्चित लोकभाका डेउडा भी यहां का आकर्षण है ।
पर्यटकीय क्षेत्रों की प्रचार–प्रसार में क्रियाशील मित्र भरतविक्रम शाह के साथ मेरी पहली मुलाकात बडिकेदार में ही हो पाया । शाह साइकिल से ही बडीकेदार पहुँचे थे । शाह वही है, जो प्रथम बार साइकिल में खप्तड पहुँचे थे । आज भी वह नेपाल सरकार द्वारा घोषित पर्यटन वर्ष सफल बनाने के लिए सुदूर पश्चिम के विभिन्न क्षेत्र में क्रियाशील हैं । बडिकेदार गांवपालिका के अध्यक्ष का कहना है कि यहां हर साल १० हजार से अधिक भक्तजन आते हैं ।
(लेखकः डुम्रेल चेम्बर अफ कमर्स डोटी के सचिव हैं ।)

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