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हिंदी पूर्ण रूप से एक समर्थ और सक्षम भाषा है : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति , काठमांडू । हिंदी दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। य़ह अपने आप में पूर्ण रूप से एक समर्थ और सक्षम भाषा है। सबसे बड़ी बात यह भाषा जैसे लिखी जाती है, वैसे बोली भी जाती है। दूसरी भाषाओं में कई अक्षर साइलेंट होते हैं और उनके उच्चारण भी लोग अलग-अलग करते हैं, लेकिन हिंदी के साथ ऐसा नहीं होता, इसीलिए हिंदी को बहुत सरल भाषा कहा जाता है। हिंदी कोई भी बहुत आसानी से सीख सकता है। हिंदी अति उदार, समझ में आने वाली सहिष्णु भाषा हिंदी भविष्य में विश्व-वाणी बनने के पथ पर अग्रसर है। विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के पुर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा कई अवसरों पर अमेरिकी नागरिको को हिंदी सीखने की सलाह दे चुके हैं। वह कहते हैं भविष्य में हिंदी सीखे बिना काम नहीं चलेगा। यह सलाह अकराण ही नहीं थी। भारत उभरती हुई विश्व-शक्ति के रूप में पूरे विश्व में जाना जा रहा है। यहां संस्कृत और हिंदी भाषा को ध्वनि-विज्ञान और दूर संचारी तरंगों के माध्यम से अंतरिक्ष में अन्य सभ्यताओं को संदेश भेजे जाने के नज़रिए से सर्वाधिक सही पाया गया है।
हिंदी भाषा के इतिहास की बात करें तो यह भाषा लगभग एक हज़ार साल पुरानी मानी जाती है। सामान्यतः प्राकृत की अंतिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिंदी साहित्य का आविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं शताब्दी से ही ‘पद्म’ रचना प्रारंभ हो गई थी। हिंदी भाषा व साहित्य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्थाह ‘अवहट्ठ’ से हिंदी का उद्भव स्वी कार करते हैं।
चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने इसी अवहट्ठ को ‘पुरानी हिंदी’ नाम दिया। हिंदी चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। हिंदी और इसकी बोलियां उत्तर एवं मध्य भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। विदेशों में भी लोग हिंदी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिंदी बोलती है।
हिंदी की शब्द सामर्थ्य पर प्रायः अकारण तथा जानकारी के अभाव में प्रश्न चिह्न लगाये जाते हैं। वैज्ञानिक विषयों, प्रक्रियाओं, नियमों और घटनाओं की अभिव्यक्ति हिंदी में कठिन मानी जाती है, किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। हिंदी की शब्द संपदा अपार है। हिंदी सतत प्रवाहिनी है, उसमें से लगातार कुछ शब्द काल-बाह्य होकर बाहर हो जाते हैं, तो अनेक शब्द उसमें प्रविष्ट भी होते हैं।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी की ‘वर्ल्ड इंग्लिश एडिटर’ डेनिका सालाजार के अनुसार अब तक हिंदी भाषा के 900 शब्दों को डिक्शनरी में जगह मिल चुकी है। दुनिया की सबसे प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) हर साल भारतीय शब्दों को जगह दे रही है। इनमें हिंदी के शब्दों की बहुलता है। ऑक्सफोर्ड ने 2019 के मार्च संस्करण में हिंदी का शब्द ‘चड्डी’ इंग्लिश शब्दों की लिस्ट मं् शामिल किया है। इसी तरह बापू, सूर्य नमस्कार और अच्छा शब्द भी इस प्रतिष्ठित शब्दकोश में जगह बना चुके हैं। साल 2017 में ऑक्सफोर्ड ने करीब 70 भारतीय शब्दों को शामिल किया था, जिनमें 33 से ज्यादा हिंदी थे। इससे पहले 2017 में नारी शक्ति और 2018 में आधार शब्द को ‘हिंदी शब्द ऑफ द ईयर’ के खिताब से नवाजा गया था।
‘अरे यार!’, भेलपूरी, चूड़ीदार, ढाबा, बदमाश, चुप, फंडा, चाचा, चौधरी, चमचा, दादागीरी, जुगाड़, पायजामा, कीमा, पापड़, करी, चटनी, अवतार, चीता, गुरु, जिमखाना, मंत्र, महाराजा, मुग़ल, निर्वाण, पंडित, ठग, बरामदा जैसे शब्द पहले से शामिल थे।
इंटरनेट पर हिन्दी के प्रसार तेजी से हो रहा है। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है।
1805 में लल्लूलाल द्वारा लिखी गई पुस्तक प्रेम सागर को हिंदी की पहली किताब माना जाता है। इसका प्रकाशन फोर्ट विलियम कोलकाता ने किया था।
सन 1900 में सरस्वती में प्रकाशित किशोरीलाल गोस्वामी की कहानी इंदुमती को पहली हिंदी कहानी माना जाता है।
1913 में दादा साहेब फाल्के ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण किया, जिसे पहर्ली हिंदी फीचर फिल्म कहा जाता है।
सन 1796 में पहली बार कोलकाता में टाइप आधारित पहली हिंदी की पुस्तक का प्रकाशन हुआ। यही हिंदी व्याकरण की पुस्तक थी। 1826 में हिंदी के पहले समाचार पत्र (साप्ताहिक) उदंत मार्तंड का प्रकाशन कोलकाता से शुरू हुआ।
पहली बोलती हुर्ई हिंदी फिल्म आलम आरा का प्रदर्शन 14 मार्च 1931 को हुआ। इस फिल्म के निर्देशक अर्देशिर ईरानी थे।

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हिंदी मात्र भाषा नहीं हिंदी हमारी विरासत है जाे विश्व पटल पर अपनी पहचान बना चुकी है  ।

जिसमें है मैंने ख्वाब बुने

जिससे जुडी मेरी हर आशा

जिससे मुझे पहचान मिली

वही हिंदी है मेरी भाषा

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