मानवता : सरोजिनी तन्हा
सरोजिनी तनहा
हिमालिनी, अंक- दिसंबर 2019 ।
कभी किसी बहते पानी में
झाँक कर देखना
जीवन कितना सरल है
कविता ही नहीं
एक शब्द में भी
बँध जाता है
उस शब्द की व्याख्या करो
तोजीवन..
मानवता कहलाता है
रखने को तो सभी
अपनी बातें रखते हैं
दोस्तों की तरह
साथ चलते हैं
दुश्मनों की तरह
वार भी करते हैं
जीवन तो आईना है
प्रतिबिम्ब मात्र दिखा देगा
जैसा भी सामने हो
वैसा ही लौटा देगा
ये दुनिया ही है
जो अजनबीयत के अहसास के साथ
अपनापन भी देती है
एक रास्ता बन्द हो
तो हजारों रास्ते
अपने आप खोल देती है
सुख और दुख तो
केवल इंसान को इंसान से ही
जोड़ या तोड़ पाता है
वो मानवता ही है
जिसके कारण
‘तनहा’ होकर भी
पूरी दुनिया से हमारा नाता है ।


