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साहित्यकारों को अपनी कलम की धार तेज करनी होगी : निक्की शर्मा रश्मि

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हिमालिनी, अंक- दिसंबर 2019 । साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है । सामाजिक सच को साहित्यकार अपनी विचारधारा से उजागर करता है । किसी भी बात को किसी भी घटना को जब हम अपनी कविता,कहानी के रूप में समाज के सामने रखते हैं तो सीधा लोगों के दिल और दिमाग को झकझोर कर रख देती है,और यह गुण एक साहित्यकार में ही होता है जो ईश्वर ने एक वरदान के रूप में उन्हें दिया है । एक समय था जब समाज में हो रही घटनाओं का यथार्थ चित्रण को हम समाज में रखते थे तो वह हमारी भावना होती थी एक प्रयास होता था समाज से जुड़ने का ।

 

साहित्य और समाज एक दूसरे से जुड़े हैं पर आज साहित्य केवल प्रसिद्धि पाने का रास्ता बन गई है । बहुत सारे लेखक साहित्य को अपने नाम कमाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं । सही को सही और गलत को गलत लिखने में हिचकिचा रहे हैं । कहीं उन पर कोई उंगली न उठा दे और सच लिखने में घबरा रहे हैं । उन्हें यह सोचना होगा कि सही दिशा देकर ही प्रसिद्धि पाएं । साहित्यकार से प्रसिद्ध जरूर मिलेगी पर स्वच्छ, सुंदर समाज को बेहतरीन रचना देकर । साहित्य में बहुत सारे लेखकों ने अपना नाम कमाया प्रसिद्धि पाई है । भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद, माखनलाल चतुर्वेदी जैसे कई साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से प्रसिद्धि पाई । उनकी रचना पढ़कर आज भी ऐसा महसूस होता है जैसे आत्मा और परमात्मा को साथ रखकर उन्होंने अपनी रचना में जान डाल दी हो ।

प्रसिद्धि ऐसे ही नहीं मिलती इतिहास गवाह है साहित्यकारों के लेखन सामाजिक, आर्थिक हर तरह की रचना मन को भा जाती थी । समाज के सामने जब भी ऐसी रचना आई तब साहित्यकारों ने प्रसिद्धि पाई और हमेशा के लिए अमर हो गए । आज भी भ्रूण हत्या,बेटियां,पर्यावरण, बेरोजगारी कोई भी मुद्दा हो साहित्यकार अपनी लेखनी से भरपूर कोशिश कर हर पहलू को उजागर करके अपनी रचनाओं से समाज के सामने अपने विचार रखे और समाज को सच दिखाए । बहुत साहित्यकारों से समाज में हो रहे क्रिया, प्रतिक्रिया हमें साहित्य में पढ़ने को मिल रही है । साहित्य से हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं और जब यही भावना समाज पर अमिट छाप छोड़ जाती है तो प्रसिद्धि मिल जाती है । साहित्यकार के साथ उससे जुड़ी रचना भी अमर हो जाती है । कुंदन जैसा दमक उठता है साहित्यकार ध्रुव तारा की तरह चमकता है उठता है । साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज को एक नई दिशा देता है, समाज के हर कसौटी पर खरा उतरता है । साहित्य समाज का अंग है और समाज से ही प्रसिद्धि । प्रेमचंद, महादेवी वर्मा जैसे अनेकों साहित्यकार ने अपनी लेखनी से समाज का आइना दिखाया है और प्रसिद्धि पाई । एक साहित्यकार समाज की अच्छाई, बुराई को अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के सामने लाता है और यह एक चुनौती भी होती है । चुनौतियों से लड़कर अपनी कविताओं और कहानियों के माध्यम से बहुत साहित्यकारों ने प्रसिद्धि पाकर हमेशा के लिए अमर हो गयें । सही को सही और गलत को गलत एक साहित्यकार का कर्तव्य है उसे सही तरीके से समाज के सामने रखें । इसे अपने विचार से समाज को अवगत कराकर एक सुंदर समाज और जागरूक समाज बनाए । सही दिशा देकर प्रसिद्धि पाए ।

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साहित्यकार को प्रसिद्धि जरूर मिलेगी स्वच्छ, सुंदर और समाज को बेहतरीन रचना देकर । साहित्य ही एक ऐसा माध्यम है जिसे हम अपनी बात पूरी तरह समाज के सामने रखते हैं, साहित्यकार अपनी बात को नैतिक कर्तव्य समझकर स्पष्ट लिखें । अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरो कर अपनी सोच साहित्य के माध्यम से सामने लाएं । साहित्यकार अपने दायित्व अपनी जिम्मेदारी को समझें और यथार्थ चित्रण करें । सत्य को उजागर करें और साहित्यकार की हर भूमिका में उच्चतम स्तर तक सहयोग करें । समाज में एक क्रांति ला दे । समाज में साहित्यकार स्वच्छ और स्पष्ट लिखकर प्रसिद्धि पाए क्योंकि साहित्य समाज का आईना है और आईना कभी झूठ नहीं बोलता चाहे वह उसकी प्रसिद्धि की ही बात क्यों ना हो सत्य की जीत हमेशा होती है,और सच को उजागर करना ही एक साहित्यकार का उद्देश्य है और कर्तव्य भी । साहित्यकारों को अपनी कलम की धार तेज करनी होगी सच लिखकर समाज को सही दिशा देनी होगी ।

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