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हांगकांग के लिए चीन का नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून । नए कानून पर अन्य देशों से माँगा समर्थन

 

हांगकांग अब चीन का हिस्सा है, हमेशा-हमेशा के लिए। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने यह दो-टूक संदेश हांगकांग को दिया है। कभी ब्रिटिश उपनिवेश रहे हांगकांग को चीनी शासन में लौटने की 20वीं सालगिरह के मौके पर यह पैगाम दिया गया था।  1997 में ब्रिटिश नियंत्रण से निकलकर चीनी आधिपत्य स्वीकारते समय हांगकांग से चीन ने यह वादा किया था कि वह उसके लिए ‘एक देश, दो व्यवस्था’ की नीति अपनाएगा। इसका आशय था- हांगकांग को स्थानीय रूप से स्वायत्तता देना, जिसमें स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था, मुक्त पूंजीवाद, आजाद प्रेस और अभिव्यक्ति की निजी आजादी शामिल थीं। लेकिन 73 लाख की आबादी वाले हांगकांग के अनेक लोगों को यह लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन लगातार उनकी आजादी को कम करता जा रहा है। 2014 के आखिरी महीनों में काफी सारे लोग हांगकांग के चुनाव में चीन की दखलंदाजी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे और करीब 11 हफ्तों तक सड़क पर डटे रहे। उन विरोध प्रदर्शन ने ‘अंब्रेला मूवमेंट’ के रूप में ख्याति पाई थी। आज हांगकांग की विधायी संस्था में दो तरह के सदस्य हैं। एक वे, जिनकी पूर्व मंजूरी चीन ने दी और दूसरे वे, जिन्हें अवाम ने लोकतांत्रिक तरीके से चुना है, और जो लोकतंत्र व स्वायत्तता के पैरोकार हैं। नतीजतन, वहां अक्सर विधायी गतिरोध कायम हो जाता है। ऐसे में, शैक्षिक सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम रुके पड़े हैं। बहरहाल, जो पुराने नागरिक हैं, वे काफी सावधानी बरतते हुए विनम्र तरीके से चीन को ‘एक देश, दो व्यवस्था’ का उसका वादा याद करा रहे हैं, लेकिन जो युवा हैं, जो पश्चिम जैसी आजादी के आदी हैं, वे चीन से पूर्ण आजादी की बातें करने लगे हैं। एक हालिया सर्वे बताता है कि 18 से 29 साल आयु वर्ग के महज तीन फीसदी नौजवान खुद को चीनी मानते हैं।…

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हांगकांग  में चीन के खिलाफ बढते विरोध के बीच चीन ने हांगकांग के ऊपर नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने के अपने  फैसले को लेकर भारत सहित अन्य देशों का समर्थन मांगा है और कहा है कि इसका लक्ष्य इस पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी में ‘पृथकतावादी’ ताकतों को काबू में रखना है जिन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए ‘गंभीर’ खतरा पैदा कर दिया है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की धार को कुंद करने के लिए चीन ने नए मसौदा कानून के कारणों को स्पष्ट करते हुए  अन्य देशों को पत्र लिखा है और कहा है कि ‘हांगकांग’ विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखना विशुद्ध रूप से चीन का अंदरूनी विषय है।

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चीन ने हांगकांग पर अपना नियंत्रण मजबूत बनाने के लिए शुक्रवार को अपनी संसद में हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का मसौदा पेश किया था। इसे 1997 के बाद से हांगकांग की क्षेत्रीय स्वायत्तता एवं निजी स्वतंत्रता के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। हांगकांग 1997 में ही चीन शासन के अंतर्गत आया था। हांगकांग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। ब्रिटेन द्वारा एक जुलाई, 1997 को हांगकांग की संप्रभुता चीन को सौंपने के बाद से वहां ‘एक देश दो विधान’ रहा है। इस व्यवस्था में उसे कुछ स्वतंत्रताएं मिलीं जो बाकी चीन को प्राप्त नहीं हैं।

विभिन्न देशों को सौपें पत्र में चीन ने कहा है, ”आपके देश का हांगकांग के साथ घनिष्ठ आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग और दोनों की जनता के बीच आपसी संबंध रहा है। हांगकांग की समृद्धि एवं दीर्घकालिक स्थायित्व पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के साझे हितों तथा हांगकांग में आपके देश के वैध हितों के अनुरूप है। हम आशा करते हैं कि आपकी सरकार इसे समझेगी और चीन की प्रासंगिक पद्धतियों का समर्थन करेगी।”

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इस पत्र में कहा गया है कि 23 साल पहले हांगकांग चीन को लौटाए जाने के बाद से हांगकांग एसएसआर ने चीन के संवैधानिक एवं मूल कानून के अनुरूप राष्ट्रीय सुरक्षा की खातिर अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन नहीं किया है। उसमें कहा गया है, ”हांगकांग की कानून प्रणाली में स्पष्ट खामियां है और उसे लागू करने की प्रणाली का अभाव है। हांगकांग में विरोधी तत्वों ने चीन की मुख्य भूमि के प्रति अलगाववाद, तोड़फोड़, घुसपैठ और विध्वंसक गतिविधि चलाने के लिए बाहरी तत्वों से हाथ मिला लिया है।”

उसमें कहा गया है, ”पिछले साल हांगकांग में संशोधन विधेयक पर उथल-पुथल से एसएआर के कानून के शासन, उसके स्थायित्व को बड़ा नुकसान पहुंचा तथा अर्थव्यवस्था एवं लोगों की जीविका तहस-नहस कर दी।” पिछले साल से हांगकांग में लाखों लोग अधिक सवायत्तता और चीन के कम दखल देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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