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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में श्रीराम पर आधारित घटनाओं पर पहला वर्चुअल स्कूल

 

वाराणसी, जेएनएन।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र प्रिंस तिवारी ने बुधवार को श्रीराम के जीवन पर आधारित घटनाओं को समाज मे प्रचार प्रसार और उनके आदर्शों को जन जन तक पहुंचाने के लिए वर्चुअल क्लास की शुरुआत की है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. रजनीश कुमार शुक्ला (कुलपति, अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय) ने कहा कि”वह राम जो घट-घट वासी है,सर्वज्ञ है,सर्वत्र है उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को वर्चुअली उंगलियों की पोर पर ही सबके सामने लाया जा सके जिसे जानकर, समझकर लोग अपना जीवन सफल कर सके इसे सोच पाना भी वास्तव में रामकृपा ही है।” ऋग्वेद में राम है,पद्मपुराण में राम हैं। जहां से भारत की ज्ञानराशि का शुभारंभ होता है वहां भी सर्वत्र राम है।भगवान श्री राम भारत की सनातन वैदिक संस्कृति के अनन्य संरक्षक हैं। राम इस भारतीय समाज के आदर्श हैं।

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विश्व के कण-कण में राम विद्यमान है। विश्व के सभी धर्मों के अनुयायी राम जी को अपना आदर्श अपना पूर्वज मानते हैं। प्रिंस तिवारी ने बताया कि भगवान श्री राम के युगों पुराने आदर्श एवं रामायण के संस्कारों को अभिनव तरिकों से नई युवा पीढ़ी तक लेकर जाने के लिए दुनिया के पहले वर्चुअल स्कूल “स्कूल ऑफ राम” का वर्चुअल शुभारंभ किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ नेशनल युथ अवॉर्डी खेल एवं युवा कार्यक्रम भारत सरकार डॉ. रामदयाल सैन ने कार्यक्रम की भुमिका रखते हुए अतिथि परिचय के साथ किया।

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प्रिंस तिवारी ने बताया कि स्कूल ऑफ राम के माध्यम से रामायण एवं रामकथा के संदेशों को पोस्टर, विडिओ, शॉर्ट फिल्म, ग्राफिक्स आदि की सहायता के प्रचारित-प्रसारित करेंगे। इसी के साथ हम विभिन्न संगोष्ठियां, वेबिनार, सम्मेलन, व्याख्यानमाला, कार्यशाला, आर्ट फेस्टिवल एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में रामायण के सकारात्मक संदेशों के प्रसारण का भागीरथ काम करेंगे । इसे विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय में भी गतिविधियों, वर्कशॉप के माध्यम से युवाओं को स्कूल ऑफ राम के उद्देश्य एवं इसके संदेश से अवगत कराने का प्रयास करेंगे।ताकि समाज के लोग राम से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में खुब उन्नति करे। कार्यक्रम में इतिहास विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार सोनकर ने आगन्तुक महानुभावों का धन्यवाद ज्ञापन किया। वर्चुअल कार्यक्रम का प्रसारण फेसबुक, युट्यूब, ट्विटर के माध्यम से किया गया जिसमें देश विदेश के कई प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लिया।

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