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सीरिया के पतन के साथ तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक दिसम्बर 025 । युद्ध कभी भी फलदायी नहीं होता, किन्तु युद्ध होता रहा है और आगे भी होता रहेगा । मानवजाति पहले ही दो बार विश्व युद्ध का दंश झेल चुकी है । लेकिन, इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक बार हम फिर इसी त्रासदी की तरफ बढ़ रहे हैं । रूस–यूक्रेन, इजरायल–हमास, इजरायल–ईरान, लेबनान और सीरिया, ये सभी उन देशों के नाम हैं, जो अभी किसी न किसी रूप में युद्ध कर रहे हैं । इसके अलावा इजरायल के खिलाफ दुनिया के ४० से ज्यादा इस्लामिक देश एकजुट हो रहे हैं, तो वहीं रूस बाहर से समर्थन दे रहा है । दूसरी ओर, अमेरिका सहित नाटो समूह के देश इजरायल के साथ खड़े नजर आते हैं । उत्तर कोरिया तो हर समय युद्ध की धमकी और न्यूक्लियर टेस्ट करता ही रहता है । इन सभी के बीच भारत–पाकिस्तान और चीन आपसी मनमुटाव में उलझे हैं तो चीन, ताइवान पर चढ़ाई करने को आतुर है, जिसे अमेरिका हर हाल में बचाना चाहता है । अर्थात् विश्व का परिदृश्य युद्धमय बना हुआ है ।

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सीरिया में तेरह साल से जारी गृह युद्ध के बाद पिछले हपÞm्ते आखिरकार विद्रोही गुट राजधानी दमिश्क पहुंचे और उन्होंने राष्ट्रपति बशर अल–असद के राज के अंत का ऐलान कर दिया । असद का पचास साल का शासन ताश के पत्तों की तरह बिखर गया । इस परिस्थिति में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में प्रोफेसर डेविड स्टीवेंसन का मानना है कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन अब इसका खतरा ज्यादा बढ़ गया है । सीरिया में जो हालात हैं, यहां के गृहयुद्ध में अमेरिका, इजरायल, रूस और ईरान के किए गए दखल ने अब स्थिति को एक गंभीर मोड़ पर ला दिया है । सीरिया से भले ही राष्ट्रपति असद भागकर रूस में छिप गए हों और वहां पर विद्रोहियों ने अपनी विजय घोषित कर ली हो, लेकिन अब रूस ईरान के साथ मिलकर सीरिया पर पलटवार कर सकता है जिसके गंभीर नतीजे देखने को मिल सकते हैं, फिर भी इसे सीधे तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कहना ठीक नहीं होगा ।

किन्तु असद के जाने के बाद से यह तय हो गया है कि हयात तहरीर अल–शाम दमिश्क में किसी भी राजनीतिक सत्ता में एक केंद्रीय भूमिका निभाएगा । क्या हयात तहरीर अल–शाम या तुर्की समर्थित सीरियाई राष्ट्रीय सेना हयात तहरीर अल–शाम नेतृत्व वाले समूहों के साथ मिलकर एक सरकार बनाएगी यह सवाल अब भी उठ रहा है । हालांकि, इन तीन समूहों के बीच गहरी दुश्मनी है । खतरा यह है कि सीरिया की सत्ता कहीं इस्लामिक स्टेट और ज्त्क् जैसे आतंकी गुटों के हाथ न लग जाए । हयात तहरीर अल–शाम का संबंध अलकायदा से भी रहा है । ऐसे में माना जा रहा है कि सीरिया कहीं तीसरे विश्वयुद्ध की वजह न बन जाए ।

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इस बीच बाबा वेंगा की भविष्यवाणी ने दुनिया को चौंका दिया है । उनकी दशकों पुरानी भविष्यवाणी पर भरोसा करें तो तीसरा विश्वयुद्ध कुछ ही महीनों दूर है । उनकी भविष्यवाणी के मुताबिक सीरिया के पतन के साथ तीसरा विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है और चूंकि मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण दिख रहे हैं । ऐसे में अगर स्थिति बिगड़ती है तो यह भविष्यवाणी आसानी से सच हो सकती है । अगर तीसरा विश्वयुद्ध होता है तो इसका मतलब होगा कि अनगिनत लोगों की जान जाएगी । साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भयानक होगा । इसके अलावा यह कहना भी मुश्किल होगा कि भू–राजनीतिक स्थितियां क्या होंगी । मौजूदा समय में दुनिया के पास ज्यादा आधुनिक हथियार हैं और अब अगर युद्ध होता है तो यह जमीन, जल और आकाश तीनों जगहों पर होने के साथ–साथ साइबर तरीके से भी किया जाएगा । इससे ज्यादा जान जानें के अलावा आर्थिक रूप से भी अधिक नुकसान की आशंका है । दूसरे विश्व युद्ध में जहां परमाणु शक्ति सिर्फ अमेरिका के पास थी, आज दुनिया के दर्जनभर देशों के पास परमाणु बम हैं । इतना ही नहीं हाइड्रोजन बम और केमिकल वीपन भी खूब डेवलप कर लिए गए हैं । लिहाजा विश्व युद्ध के हालात में नुकसान का अंदाजा हम और आप बखूबी लगा सकते हैं । वैश्विक स्तर पर मंड़राता खतरा हमें परेशान भी कर रहा है । फिर भी विश्व शांति की उम्मीद के साथ सकारात्मक सोच यह बनाएँ कि २०२५ वैश्विक स्तर पर शांत और सुखद रहे ।

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डॉ श्वेता दीप्ति
सम्पादक, हिमालिनी

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