Mon. Jul 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

गोरैया का संदेश : चंद्रकिशोर

 

गोरैया का संदेश

फुर्र से वह आई —
जैसे किसी अनदेखे लोक से
हवा के परों पर सवार होकर।
मेरे आँगन में,
धूप की किरणों के बीच उतर आई —
एक छोटी, अनजान गोरैया।

उसकी आँखों में सुबह का उजाला था,
उसके पंखों में पवन का गीत।
वह चहकी —
मानो किसी भूले हुए स्वप्न की याद दिला रही हो,
या शायद कह रही हो —
“क्या तुम अब भी सुन सकते हो
पेड़ों की नब्ज़,
धरती की साँस?”

यह भी पढें   वरिष्ठ नागरिक अगुवा एवं पूर्व अर्थमन्त्री डॉ. देवेंद्र राज पांडेय का निधन

मैं उसके स्वर को नहीं समझ सका,
पर मेरे भीतर कुछ काँपा —
जैसे हृदय की किसी खिड़की से
पुरानी रौशनी भीतर उतर आई हो।

वह चहचहाई,
और लगा — यह कोई भाषा नहीं,
यह तो वही प्रार्थना है
जो हर जीव अनकही करता है —
जीवन की, प्रेम की, अस्तित्व की।

फिर वह उड़ गई —
धूप की परतों को चीरते हुए
आसमान में विलीन।
और मैं रह गया —
अपने मौन में,
उसके गीत की गूंज लिए,
मानो किसी अदृश्य मित्र ने
छूकर कह दिया हो —
“सुनो, तुम अकेले नहीं हो।”

यह भी पढें   संसद सदस्यों को स्वकीय सचिव नियुक्त करने की अनुमति
चंद्रकिशोर
बरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *