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ओली की गिरफ्तारी के बाद एमाले द्वारा सरकार के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक संघर्ष का ऐलान

 

काठमांडू, 28 मार्च:
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और की गिरफ्तारी के बाद (एमाले) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की शनिवार सुबह हुई सचिवालय बैठक में इस कार्रवाई को प्रतिशोधपूर्ण, पूर्वाग्रही और गैरकानूनी बताते हुए सरकार के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक स्तर पर मजबूत प्रतिवाद करने का निर्णय लिया गया।

पार्टी के महासचिव ने बताया कि बैठक में ओली और नेपाली कांग्रेस के नेता व पूर्व गृहमंत्री की सूर्योदय से पहले की गई गिरफ्तारी की कड़ी निंदा, भर्त्सना और विरोध किया गया।

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बैठक की अध्यक्षता पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने की। बैठक में कहा गया कि ओली और लेखक की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन की भावना के खिलाफ है और दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की गई।

एमाले ने यह भी कहा कि 2082 भदौ 23–24 की घटनाओं की जांच के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग पर पार्टी ने शुरू से ही आपत्ति जताई थी। पार्टी का आरोप है कि आयोग की रिपोर्ट पूर्वाग्रही, प्रतिशोधपूर्ण और न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

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पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच आयोग बनाया जाए।

एमाले ने ओली और लेखक की गिरफ्तारी को नियोजित और निर्देशित कार्रवाई बताते हुए राजनीतिक दलों, नागरिक समाज और आम जनता से लोकतंत्र, कानून के शासन और मानवाधिकार की रक्षा के लिए संयुक्त पहल करने की अपील की है।

पार्टी ने यह भी घोषणा की कि गिरफ्तारी के विरोध में रविवार (चैत 15) को देशभर में पार्टी के जिला कमेटियों द्वारा जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से नेपाल सरकार को विरोध पत्र सौंपा जाएगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अन्य राजनीतिक दलों के साथ समन्वय कर आंदोलन के और कार्यक्रम भी तय किए जाएंग

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