रैली को लेकर पटना के गांधी मैदान में भारी सुरक्षा के इंतजाम हैं। मैदान के बाहर भी चप्‍पे-चप्‍पे पर पुलिस तैनात है।

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सीमा पार की सैन्य कार्रवाई के बाद नरेंद्र मोदी को सुनने की दिलचस्पी बढ़ी है। लिहाजा, भीड़ के अधिक होने का अनुमान है।

रैली का राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ गया है कि यह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही है और एक तरह से यहां से चुनाव का शंखनाद किया जाएगा। हालांकि, इसके पहले 17 फरवरी को प्रधानमंत्री ने बेगूसराय में राज्य के लिए 33 हजार करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घोषणा की थी। इसमें पटना मेट्रो की महात्वाकांक्षी परियोजना भी शामिल है। इसके बावजूद उम्मीद की जा रही है प्रधानमंत्री अपने संबोधन के दौरान राज्य के विकास के लिए कुछ और महत्वपूर्ण घोषणाएं करेंगे।

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यह पहला अवसर होगा जब प्रधानमंत्री की हैसियत से नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक ही मंच से एनडीए के पक्ष चुनाव की कोई चर्चा करेंगे। दोनों किसी राजनीतिक रैली में नौ साल बाद एक साथ दिखेंगे।

राजग की इस रैली पर विपक्षी दलों की भी नजर है। इसमें जुटने वाली भीड़ के आधार पर ही विपक्ष अपनी ताकत को तौलेगा। इससे पहले फरवरी में इसी गांधी मैदान में कांग्रेस की रैली हुई थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी मुख्य वक्ता थे। महागठबंधन के अन्य दलों के नेताओं ने भी इसे संबोधित किया था।

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