मधेश और मधेशी पत्रकार::आर.सी. यादव
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चार और संचार जगत, पत्रिका और पत्रकार जगत, इन दोनों को मिलाकर इन दोनों जगहों पर काम करने वालों को मूल रुप में पत्रकार कहा गया है । पत्रकार का सम्बन्ध देखा जाए तो विशेष करके आम जनता से जुडा होता है । वे जनता को कभी सूचित करते हैं तो कभी सचेत कराते हैं । इनका काम एक संवेदनशील काम होता है । आम जनता इन्ही पर विश्वास करती है । लेकिन आजकल पत्रकारिता एक तरह से ऐसे दलदल में फंसती जा रही है कि उसको उस जगह से निकलना काफी मुश्किल हो जाएगा । पत्रकार और पत्रिका दोनों को लोग शंका की दृष्टि से देखने लगे हैं । कारण आजकल ऐसे बहुत से पत्रकार हैं जो नाम के लिए पत्रकार हैं । उनका मूल रुप से किसी पत्रिका से संबंध है न मूल रुप से किसी संचार क्षेत्र से । है भी तो न उनका इस विषय से कोई सम्बन्ध है न कोई उस जगह पर पहुँचने की हैसियत । फिर भी वे पत्रकार हैं । आप सोच रहे होंगे ऐसे लोग कैसे पत्रकार हैं और कहां है – तो आपको कहीं दूर जाने की जरुरत नही है । नेपाल के अन्दर ही ऐसे पत्रकारों से आप मिल सकते हैं । मधेश और मधेशियों के लिए काम का नही ऐसे ही पत्रकार लोग ढेÞर सारे आपको मिल जाएंगे । उनका अपना अलग-अलग संघ और संगठन भी है पत्रपत्रिका भी चलाते हैं । हम आपके साथ हैं, कहने के लिए प्रेस विज्ञप्ति भी कभी-कभी जारी करते हैं, दिखावा के लिए भले ही कोई और संचार जगत पत्रकारिता उसे बोले या ना बोले छापे या ना छापे फिर भी वे आपके लिए काम करते हैं । समझ ही गए होंगे – जी हाँ मैं आपसे यह कहना चाहुँगा कि उनको दूसरे संवेदनशील पत्रकार पर ना कभी विश्वास हुआ ना कभी उनकी बातों को वे माने न कभी उन्हें अपने साथ रखा । तो आप पर अन्य मीडिया कैसे विश्वास करेगा – बहुत बार यह आवाज आम जनता से आती है । यह पत्रकार, यह पत्रिका इस राजनीतिक दल के पिछलग्गू है तो कभी-कभी यह आरोप लग जाता है कि यह इस राजनीतिक दल का भातृ संगठन है । जब ऐसे है मधेश और मधेश के पत्रकार तो, उनपर आम जनता कैसे विश्वास करे ।
इनमें से कुछ ऐसे मधेशी पत्रकार भी हंै जो अपने समाज और देश के लिए कुछ भी कर रहे हैं और फिर भी संघ-संगठन चलाने वाले पत्रकार लोग इन पर विश्वास नही करते । इनसे दूर भागना चाहते हैं, कारण एक ही हो सकता है वे इनका भण्डाफोड ना कर दें । मधेश और मधेशी पत्रकार के रुप में इनकी हैसियत क्या है – सारी बात आम जनता के सामने आ जाएगी । कुछ ऐसे पत्रकारों का कहना है कि वे लोग हमारे संगठन में आकर भी कुछ काम नहीं करते, मैं उन पत्रकारों से एक सवाल करना चाहूँगा कि राजनीतिक दल के पीछे-पीछे चलना उनसे पैसे लेकर उनका चमचागिरी करना ही पत्रकारिता है तो ऐसे मधेशी पत्रकार बनकर रहने से अच्छा है कि हम स्वतंत्र पत्रकार ही रहें । आपको कुछ काम मधेश के लिए करना है तो उनकी आवश्यकता के उपर आप सदैव बहस करें । कलम चलाएँ, इसके बाद ही आपको एक सच्चा मधेशी पत्रकार माना जाएगा । आज मधेश और मधेशी पत्रकार के रुप में विभिन्न राजनीतिक दल से जुडा एक जमात खडा है । वे कहने के लिए पत्रिका चलाते हैं । संगठन भी चलाते हैं । लेकिन न वे कुछ मधेश के लिए करते हैं न कुछ मधेशियों लिए वे करते हैं तो वे सिर्फराजनीतिक दल के लिए काम करते हैं । हम उनसे आग्रह करना चाहेंगे कि आप अपने दिल पर हाथ रखकर सोचें और सच्चे मधेशी पत्रकार बनने की कोशिश करें । नहीं तो आने वाले दिनों में आपकी हैसियत आम जनता के समक्ष आ जाएगी । आप का नकाब उतर जाएगा । एक कहावत है, ‘धोबी का कुत्ता न घर का, न घाट का’ । ऐसा समय नही आए । यही मेरर्ीर् इश्वर से पर््रार्थना रहेगी ।

