सभासदों के कारनामें
संविधान बनाने के लिए हमने अपने सभासदों को तीन वर्षों का समय दिया और हम इतने उदार हैं कि और भी समय बढÞा दिया है ताकि उनकी रोजी रोटी चलती रहे । उनके आगे पीछे चापलूसी करने वालों के घर का चूल्हा जलता रहे । हमारे माननीय सभासद विदेश भ्रमण करते रहें । और कुछ नहीं तो पासपोर्ट बेचकर भी लोगों की सेवा करते रहे । संविधान का क्या है, बीते तीन सालों में नहीं तो आने वाले तीन सालों में बना ही देंगे ।
पिछले तीन वर्षों के दौरान हमने अपने सभासदों के अनेक रुपों के दर्शन हुए । यह हमारा सौभाग्य है, और लोकतंत्र की महानता है कि हमें अपने सभासदों के इतने रुपों के दर्शन हुए । कोई सदन में चप्पल चलाता दिखा, कोई पासपोर्ट बेचते दिखा, कोई शराब के नशे में सरेआम नौटंकी करता दिखा । इतना ही नहीं बेचारे नौकरी दिलाने के लिए एक सभासद को तो रिश्वत लेते पुलिस ने भी पकडÞ लिया था । हमारे कुछ दबंग सभासद तो सदन में हथियार लेकर प्रवेश कर जाते हैं और कुछ दूसरों के ही गाडÞी को अपना कह कर चलाते हैं । आइए जानते है कि हमने जिन ‘आम’ लोगों को सभासद की पदवी देकर खास बनाया है उनके असली चेहरे कैसे हैं ।
संविधान सभा की बैठक के पहले ही दिन एमाले की सभासद कमला शर्मा ने नेपाली कांग्रेस के सभासद पर्ूण्ा बहादुर खडका को सदन के भीतर ही चप्पल दे मारा । अपने पति की हत्या में संलग्न होने का आरोप लगाते हुए कमला शर्मा ने खडका को चप्पल से मारा । लोगों को लगा कि अरे ये क्या हो गया – लेकिन वो तो सिर्फएक झलक था हमारे सभासदों के असली चरित्र उजागर होने का । पिछले तीन वर्षों के दौरान तीन दर्जन से अधिक सभासदों ने अपनी असलियत दिखाई है ।
इसके कुछ दिन बाद एक एमाले के सभासद डोल बहादुर कार्की को एक युवक से पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर एक लाख रुपैया रिश्वत लते रंगे हाथों गिरफतार किया गया । कार्की पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है ।
माओवादी सभासद लोकेन्द्र विष्ट तो हथियार सहित ही संसद भवन में प्रवेश कर गए थे । सुरक्षाकर्मियों ने उनका हथियार जफ्त कर लिया लेकिन विष्ट पर कोई कारवाही नहीं हर्ुइ । विष्ट इस समय राज्य पर्ुनर्संरचना संसदीय समिति के सभापति पद पर आसीन है ।
कांग्रेसी सभासद कृष्ण प्रसाद यादव ‘वेश्या’ के साथ देखे गए । २०६५ फागुन में महाराजगंज स्थित कान्ति बाल अस्पताल के पीछे एक घर पर पुलिस द्वारा छापामारी करने के बाद जब वहाँ माननीय सभासद दिखे तो पुलिस के होश ही उडÞ गए । बाद में पुलिस के ही मदत से उन्हें सुरक्षित भगा दिया गया था ।
फोरम लोकतान्त्रिक की सभासद तथा पर्ूव कृषि राज्यमंत्री करीमा बेगम ने तो पर्सर्ााे प्रमुख जिला अधिकारी को थप्पडÞ ही मार दिया । विमानस्थल पर गाडÞी ना भेजने की बात कहते हुए बेगम ने अपने र्समर्थकों के साथ जिला प्रशासन कार्यालय में जाकर सीडिओ दर्ुगा प्रसाद भण्डारी को उनके ही चैम्बर में घुसकर गाल पर एक जोडÞदार थप्पडÞ मारा था ।
खनाल सरकार में पर्यटन मंत्री रहे खडग बहादुर विश्वकर्मा को पुलिस ने चोरी की गाडी के साथ पकडÞा था । सभासद को तो छोडÞ दिया गया लेकिन गाडÞी को पुलिस ने अपने ही नियंत्रण में रखा । बाद में राजनीतिक दबाव की वजह से उनकी गाडÞी भी छोडÞ दी गई । खडÞग विश्वकर्मा प्रचण्ड सरकार में भी महिला बालबालिका तथा समाज कल्याण मंत्री रह चुके है ।
पिछले साल भदौ २७ गते कांग्रेस के सभासद अच्युतराज पाण्डे जुवा खेलते पकडÞे गए । भोटेबहाल स्थित दिनेश शेरचन के घर पर जुवा खेलते हुए पाण्डे को गिरफ्तार किया गया ।
सद्भावना पार्टर्ीीे सभासद खोभारी राय को दरबारमार्ग पर राजतंत्र के पक्ष में नाराबाजी करते हुए पकडÞा गया था । वैसे खोभारी राय को डेढÞ वर्षपहले भी हथियार सहित गिरफ्तार किया जा चुका है ।
२०६६ माघ में पर्सर्ााे माओवादी सभासद चन्दा देवी को उनके कुछ र्समर्थकों के साथ जंगल में अवैध लकडÞी की कर्टाई करते हुए पकडÞा गया था ।
ओखलढुंगा से माओवादी सभासद बालकृष्ण ढुंगेल पर हत्या के आरोप में सर्वोच्च अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है लेकिन अभी भी वो बाहर घुम रहे हैं और सभासद की सारी सुख सुविधाओं का उपभोग कर रहे है ।
गत वर्षमंसिर ३ गते संसद में बजट पेश करने के दौरान माओवादी सभासदों ने वित्त मंत्री सुरेन्द्र पाण्डे के साथ हाथापाई की थी । इनमें र्सर्ूयमान दोंग, चन्द्रबहादुर थापा और लेखराज भट्ट की संलग्नता थी लेकिन अभी तक इन पर कोई भी कार्रवाही नही हो पायी है । माओवादी की सभासद पर बिजली चोरी करने के आरोप में जर्ुमाना लगाया गया है ।
इसी वर्षमाले समाजवादी की सभासद शारदा नेपाली ने नेपालगंज में शराब पीकर पूरे दिन हंगामा किया था । दलित जनजाति पार्टर्ीीे अध्यक्ष विश्वेन्द्र पासवान ने संवैधानिक समिति की बैठक के दौरान कर्ुर्सर्ीीmेंकी, माइक तोडÞा और तो और अपने कपडेÞ भी फाडÞ डाले ।
ये तो कुछ छोटे-मोटे उदाहरण हैं । सभासदों के असली रुप तो पासपोर्ट काण्ड में सामने आया, जहाँ १ दर्जन से अधिक सभासद फँसे हुए है । फोरम सभासद विपी यादव तथा जनता दल की गायत्री साह इस समय जमानत पर रिहा हुए है । कुछ सभासद फरार बताए जा रहे हैं तो कुछ अपने को बचाने की जुगाडÞ में लगे हैं ।

