Thu. Apr 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

मैं तो मजदूर हूँ नसीब से अपने, मजबूर हूँ : विनोद निराश

 

मैं तो मजदूर हूँ : विनोद निराश

नसीब से अपने, मजबूर हूँ ,

मेहनत करता हूँ, मगरूर हूँ।

दिन रात पसीना, बहाता हूँ ,

नज़र में लोगो की, बेशऊर हूँ।

धरती पर भी मैं, सो लेता हूँ ,

थकान से शरीर की, चूर हूँ।

स्वाभिमान से सदा, जीता हूँ ,

मक्कारी बेईमानी से, दूर हूँ।

यूँ तो अभावो का, अभागा हूँ ,

मगर टूटी झोपडी का, नूर हूँ।

गर्मी, सर्दी, बरसात सहता हूँ ,

इसलिए मैं थोड़ा सा, बेनूर हूँ।

यह भी पढें   नेपालगन्ज में आध्यात्मिक गुरु शंकराचार्य की जन्म  जयन्ती के अवसर पर शुभकामना आदानप्रदान

असंख्य तनावो से, मैं दबा हूँ , 

सरकारी फाइलों में, मशहूर हूँ।  

गरीबी, लाचारी से, जूझ रहा हूँ ,

क्यूँकि मैं तो, निराश मजदूर हूँ।

विनोद निराश, देहरादून (उत्तराखंड)

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed