Mon. May 25th, 2020

समाज पर पड़ता लॉकडाउन का असर

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अंशु झा

वैश्विक स्तर पर फैले कोभिड १९ (कोरोना वाइरस) के कारण संसार के अधिकांश देशों में लकडाउन प्रणाली को अपनाया गया है । इस कोरोना वाइरस का आर्विभाव चीन के वुहान नामक स्थान से हुआ जो वर्तमान में एक महामारी का रुप धारण कर लिया है । इस महामारी के कारण लाखों लोगों की जान जा चुकी है और करोडों लोग अभी भी प्रभावित है । इतना कुछ होने के बाबजुद भी लकडाउन यथावत है । अब सबसे पहले बात करते हैं कि लकडाउन है क्या ? और समाज से इसका सम्बन्ध क्या है ? क्योंकि नेपाली समाज के लिये यह लकडाउन शब्द अंग्रेजी मे होने के कारण नया है ।

लकडाउन एक ऐसी नीति है जिसका प्रयोग आपातकालीन अवस्था अर्थात् किसी प्रकार की महामारी या आपदा के वक्त किया जाता है । इस नीति के तहत लोगों को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है । यह नीति जनता के हीत में होती है । इसका तुलना हम कफ्र्यू से नहीं कर सकते हैं । इसमें डरने की बात नहीं होती है । बस धैर्यतापूर्वक अपने घरों में रहना होता है । हम कह सकते हैं कि लकडाउन का अर्थ घर में बन्द रहना (घरबन्दी) है । अब प्रश्न उठता है कि लकडाउन ने समाज को कितना प्रभावित किया है ? तो इसका जबाब सर्वविदित ही है कि इस लकडाउन के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, राजनीति व्यवस्था, संस्कृति के साथ साथ अन्य व्यवहारिक ज्ञान अपनापन इत्यादि भी प्रभावित हुआ है ।

जी हां नेपाल की सारी व्यवस्थाएं तो पहले से ही कमजोर थी उस पर से इस लकडाउन ने तो और भी झकझोर के रख दिया है । अचानक लकडाउन की घोषणा से आम नागरिक पर बहुत ही गहरा असर पडा । क्योंकि नेपाल अपने आप में सर्वसम्पन्न देश नहीं है कि अपने राष्ट्र के सारे नागरिकों को अपने देश में ही रोजगार दे सके । जिसके फलश्वरुप यहां के लोग अपना श्रम, खून, पसिना दूसरे देशों में खर्च करने पर मजबूर होते हैं । इस लकडाउन की घोषणा से अधिकांश सर्वसाधारण तथा मजदूर वर्ग तो सडक पर ही आ गये । न उसके लिये रहने का प्रबन्ध न ही खाने की सुविधा । विवश होकर वे लोग महीनों यात्रा कर अपने जन्मस्थान की ओर प्रस्थान करने पर बाध्य हो गये । इस यात्रा के दौरान कितने की जान भी गई तो कितने बीमार पडे । जो की नींदनीय है ।

स्वास्थ्य में प्रभाव ः इस लकडाउन के कारण सडक से लेकर घर बैठे मानवो में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या बढ गयी है । कोरोना वाइरस से जो संक्रमित हैं वो तो है ही परन्तु लकडाउन के कारण भी बिमारी बढ गई है । घर में कैद होने के करण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गैसट्रीक इत्यादि दीर्घरोगों के रोगियों के जीवन शैली में अधिक प्रभाव पडा है । इसी प्रकार घर में बन्द होने के कारण बच्चे से लेकर बुढे तक में डिप्रेशन का प्रभाव देखा गया है । भूख के कारण भी बहुत सारे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है ।

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अर्थ में प्रभाव ः लकडाउन के करण देश का अर्थ व्यवस्था तो धरासायी हो गया है । कितने लोगों की रोजगारी समाप्त हो गई । अर्थ आर्जन के सारे श्रोत बन्द हो जाने के कारण देश को आर्थिक संकट का सामना करना पड रहा है । फलश्वरुप राष्ट्र ने निर्णय लिया है कि फिलहाल किसी भी सरकारी निकायों में नए कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिये । न ही नये कर्मचारी का विज्ञापन तथा परीक्षाएं होनी चाहिए । और न ही कुछ नया योजना जो कि अतिआवश्यक न हो, नहीं लाया जाना चाहिये ।

शिक्षा में प्रभाव ः शिक्षा जो कि मानव विकास का एक महत्वपूर्ण अंग है वह भी बडे पैमाने पर प्रभावित हुआ है । विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा व्यवस्था अव्यवस्थित बन गयी है । कितने बच्चे परीक्षा के लिये पूर्ण तैयार होते हुये भी परीक्षा नहीं दे पाये जिससे उनमें तनाव बढते हुये दिखाई दे रहा है । फिलहाल इन्टनेट के माध्यम से पढाई संचालन किया जा रहा है जो छोटे छोटे बच्चों के लिये अनउपयुक्त सावित हो रहा है ।

राजनीतिक प्रभाव ः इस लकडाउन का फायदा उठाते हुये राजनीति भी प्रभावित हुआ है । वर्तमान सरकार द्वारा लकडाउन अवधि में अध्यादेश लाने से नेपाल की राजनीति में उथल पुथल मचा । जिससे जनता में सिर्फ निराशा ही बढी । नेपाली जनता को इस घोर विपदा का सामना करते समय राजनीतिक संकट का भी सामना करना पडा । अतः जनता अपने दो तिहाई के सरकार से असन्तुष्टी जताई । राहत इत्यादि सामाग्री वितरण में राजनीतिकरण होने के कारण लकडाउन से प्रभावित नागरिक राहत सुविधा से लाभान्वित नहीं हो पाया ।

सांस्कृतिक प्रभाव ः लकडाउन के कारण समाज में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहा है । सभी धार्मिक स्थलें, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च इत्यादि बन्द होने के कारण भक्तगण अपने भगवान के दर्शन से बन्चित हो रहे हैं । जिससे लोगों में ईश्वर प्रति लगाव कम होते हुये देखा जा रहा है । सभी लोग अपनी अपनी संस्कृति को संरक्षित करने के लिये घर से ही हरेक व्रत त्योहार पूर्ण कर रहे हैं ।

समग्र में हम कह सकते हैं कि इस लकडाउन के कारण समाज में दूरी कायम हो गई है । लोगों में अपनापन कम होते हुये दिखाई दे रहा है । इस कोरोना संक्रमण के कारण व्यक्ति एक दूसरे से दूरी बढाने के लिये लोगों से दूर भाग रहे हैं । लग रहा है मानो १८ वीं शताब्दी का छुआछुत की प्रथा फिर से आ गई हो । विदें के अनुसार यह दूरी जो अभी हमलोग बनाए हुये हैं वह समाज को कुछ वर्षों तक झेलना होगा । लकडाउन समाप्त हो जाने के बाद भी व्यक्ति एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर पायेगा ।

वैश्विक स्तर पर फैले कोभिड १९ (कोरोना वाइरस) के कारण संसार के अधिकांश देशों में लकडाउन प्रणाली को अपनाया गया है । इस कोरोना वाइरस का आर्विभाव चीन के वुहान नामक स्थान से हुआ जो वर्तमान में एक महामारी का रुप धारण कर लिया है । इस महामारी के कारण लाखों लोगों की जान जा चुकी है और करोडों लोग अभी भी प्रभावित है । इतना कुछ होने के बाबजुद भी लकडाउन यथावत है । अब सबसे पहले बात करते हैं कि लकडाउन है क्या ? और समाज से इसका सम्बन्ध क्या है ? क्योंकि नेपाली समाज के लिये यह लकडाउन शब्द अंग्रेजी मे होने के कारण नया है ।

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जी हां नेपाल की सारी व्यवस्थाएं तो पहले से ही कमजोर थी उस पर से इस लकडाउन ने तो और भी झकझोर के रख दिया है । अचानक लकडाउन की घोषणा से आम नागरिक पर बहुत ही गहरा असर पडा । क्योंकि नेपाल अपने आप में सर्वसम्पन्न देश नहीं है कि अपने राष्ट्र के सारे नागरिकों को अपने देश में ही रोजगार दे सके । जिसके फलश्वरुप यहां के लोग अपना श्रम, खून, पसिना दूसरे देशों में खर्च करने पर मजबूर होते हैं । इस लकडाउन की घोषणा से अधिकांश सर्वसाधारण तथा मजदूर वर्ग तो सडक पर ही आ गये । न उसके लिये रहने का प्रबन्ध न ही खाने की सुविधा । विवश होकर वे लोग महीनों यात्रा कर अपने जन्मस्थान की ओर प्रस्थान करने पर बाध्य हो गये । इस यात्रा के दौरान कितने की जान भी गई तो कितने बीमार पडे । जो की नींदनीय है ।

स्वास्थ्य में प्रभाव ः इस लकडाउन के कारण सडक से लेकर घर बैठे मानवो में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या बढ गयी है । कोरोना वाइरस से जो संक्रमित हैं वो तो है ही परन्तु लकडाउन के कारण भी बिमारी बढ गई है । घर में कैद होने के करण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गैसट्रीक इत्यादि दीर्घरोगों के रोगियों के जीवन शैली में अधिक प्रभाव पडा है । इसी प्रकार घर में बन्द होने के कारण बच्चे से लेकर बुढे तक में डिप्रेशन का प्रभाव देखा गया है । भूख के कारण भी बहुत सारे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है ।

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अर्थ में प्रभाव ः लकडाउन के करण देश का अर्थ व्यवस्था तो धरासायी हो गया है । कितने लोगों की रोजगारी समाप्त हो गई । अर्थ आर्जन के सारे श्रोत बन्द हो जाने के कारण देश को आर्थिक संकट का सामना करना पड रहा है । फलश्वरुप राष्ट्र ने निर्णय लिया है कि फिलहाल किसी भी सरकारी निकायों में नए कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिये । न ही नये कर्मचारी का विज्ञापन तथा परीक्षाएं होनी चाहिए । और न ही कुछ नया योजना जो कि अतिआवश्यक न हो, नहीं लाया जाना चाहिये ।

शिक्षा में प्रभाव ः शिक्षा जो कि मानव विकास का एक महत्वपूर्ण अंग है वह भी बडे पैमाने पर प्रभावित हुआ है । विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा व्यवस्था अव्यवस्थित बन गयी है । कितने बच्चे परीक्षा के लिये पूर्ण तैयार होते हुये भी परीक्षा नहीं दे पाये जिससे उनमें तनाव बढते हुये दिखाई दे रहा है । फिलहाल इन्टनेट के माध्यम से पढाई संचालन किया जा रहा है जो छोटे छोटे बच्चों के लिये अनउपयुक्त सावित हो रहा है ।

राजनीतिक प्रभाव ः इस लकडाउन का फायदा उठाते हुये राजनीति भी प्रभावित हुआ है । वर्तमान सरकार द्वारा लकडाउन अवधि में अध्यादेश लाने से नेपाल की राजनीति में उथल पुथल मचा । जिससे जनता में सिर्फ निराशा ही बढी । नेपाली जनता को इस घोर विपदा का सामना करते समय राजनीतिक संकट का भी सामना करना पडा । अतः जनता अपने दो तिहाई के सरकार से असन्तुष्टी जताई । राहत इत्यादि सामाग्री वितरण में राजनीतिकरण होने के कारण लकडाउन से प्रभावित नागरिक राहत सुविधा से लाभान्वित नहीं हो पाया ।

सांस्कृतिक प्रभाव ः लकडाउन के कारण समाज में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहा है । सभी धार्मिक स्थलें, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च इत्यादि बन्द होने के कारण भक्तगण अपने भगवान के दर्शन से बन्चित हो रहे हैं । जिससे लोगों में ईश्वर प्रति लगाव कम होते हुये देखा जा रहा है । सभी लोग अपनी अपनी संस्कृति को संरक्षित करने के लिये घर से ही हरेक व्रत त्योहार पूर्ण कर रहे हैं ।

समग्र में हम कह सकते हैं कि इस लकडाउन के कारण समाज में दूरी कायम हो गई है । लोगों में अपनापन कम होते हुये दिखाई दे रहा है । इस कोरोना संक्रमण के कारण व्यक्ति एक दूसरे से दूरी बढाने के लिये लोगों से दूर भाग रहे हैं । लग रहा है मानो १८ वीं शताब्दी का छुआछुत की प्रथा फिर से आ गई हो । विदें के अनुसार यह दूरी जो अभी हमलोग बनाए हुये हैं वह समाज को कुछ वर्षों तक झेलना होगा । लकडाउन समाप्त हो जाने के बाद भी व्यक्ति एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर पायेगा ।

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