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क्यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस ? ५ जून विश्व पर्यावरण दिवस : रीमा मिश्रा”नव्या”

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इस धरा के ज्वलन्त ताप से,हर बर्बादी सहनी होगी।
ना नीड़ हरो घर नीर भरो,ये अकथ कहानी कहनी होगी।।

रीमा मिश्रा”नव्या” | विश्व पर्यावरण दिवस पूरे विश्व में 5 जून को मनाया जाता है। आपने इसके बारे में सुना होगा लेकिन सभी लोग नहीं जानते है कि पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है। दरअसल पर्यावरण दिवस, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और राजनीतिक चेतना जागृत करने के लिए मनाया जाता है जिससे आम जनता को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर समर्पित मेरी चन्द पंक्तियाँ–

सर सर बहती हवा कह रही
मत काटो मनुज पँख हमारे ,
स्वस्थ साँस का स्रोत यही हैं
समझो सच जीवन का प्यारे ।

नहीं रहेंगे विपिन अगर तो
कैसे बदरा मोहित होंगे ,
बरखा रानी के दर्शन को
तरस रहे भू अंबर होंगे ।

तेज ताप का होगा नर्तन
बवंडर मृदंग बजायेंगे
तृप्त न होंगे कंठ जीव के
सब हा हा कार मचायेंगे।

विज्ञान लाचार सा दिखेगा
सुख संसधान मुँह चिढाएंगे ,
मनमाने कोप प्रकृति के
सब मिलकर बहुत रुलायेंगे ।

जागो मानव अब भी जागो
नहीं भोग के पीछे भागो ,
श्वास महकती यदि लेनी है
लोभ ऊँचे भवन का त्यागो ।

वृक्ष रोपण और जल संरक्षण
फ़र्ज़ ये निभाने ही होंगे ,
चूक यदि हो गयी इनमें तो
मंजर बहुत भयावह होंगे ।

—क्यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस…?

पर्यावरण दिवस बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन्ध दोहन, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग से बचाव और भविष्य में आने वाले खतरों से निपटने की इच्छा से मनाया जाता है। 19 नवंबर 1986 को लागू हुए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जल, वायु, भूमि तथा इनसे संबंधित कारक जैसे मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आते है।

पर्यावरण दिवस का उद्देश्य लोगों को हरित पर्यावरण के महत्व को समझाना और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को याद दिलाना है।

पर्यावरण का अर्थ है हमारे आसपास का क्षेत्र जो कुछ भी हो सकता है ,सडक नदी मन्दिर आदि । जिसे हम गन्दा करते हैं यहां तक लोग मन्दिर नदी में भी कूडा फैंकते हैं भारता माता के उपर भी ।

पहले भारत सोने की चिडियां कहलाता था ,क्योंकि सोने पर कूडा या गन्दगी नही लगती । पर अब लोग पर्यावरण का महत्व समझते ही नही हैं । अगर भारत ही नही विश्व का हर एक जिम्मेदार व्यक्ति पर्यावरण शब्द का मतलब समझ ले तो ना विश्व में कोई बीमार पडेगा और ना भारत को कोई सोने की चिडिया बनने से रोकेगा । बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जे पर्यावरण दिवस को आज भी भूल सा जाते हैं पर अगर कोई पर्यावरण दिवस हर रोज मनाये तो गन्दगी कूडा जैसा कोई शब्द इस दुनियां में नही रहेगा ।मैं ये सोचती हूं कि किसने गन्दगी फैलाई और क्यों …?

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पर्यावरण का एक और अर्थ है साफ सफाई स्वस्छ सुन्दर साफ सफाई से हम सब साफ रहेंगे स्वच्छ सुन्दर से हम अपने देश को सोने की चिडियां और जग सिरमौर बनाऐगे और स्वस्थ रहेंगे तो बीमारी रोग सब दूर हो जाऐगे अगर मैं पर्यावरण की बात गहराई से करूंगी तो करोडों पेज भर जाऐगे पर मेरे मन का पर्यावरण शब्द का महत्व समझाना खतम नहीं होगा ।पर्यावरण का साफ सफाई से गहरा नाता है जिसे कुछ लोग मन में तोडने का भाव रखते हैं ।

मैं पर्यावरण से क्षमा चाहती हूं क्योंकि हम सब तुम्हारा इतना ध्यान नहीं रखते और न साफ सफाई का । पर्यावरण शब्द से हम सबको एक सीख मिलती है कि हमे साफ सफाई रखनी चाहिये पर क्या करें कोई हमारी इन बातों को नही समझेगा । पर्यावरण के बारे में बस वह समझ सकते हैं जिनका साफ सफाई से गहरा नाता है । पहले लोग घर की सफाई के लिए क्या क्या नहीं करते थे ।जब भी कोई पर्यावरण के बारे में मेरी तरह लिखता है या बोलता है तो उसे सोचने की जरूरत नही पड़ेगी ।

कितनी प्लास्टिक थैलियाँ दिन में लेते हैं हम..”?

–प्लास्टिकजन्य प्रदूषण —

आप रोज सब्जियाँ या फल खरीदने जाते हैं और हर बार अपने घर से कपड़े की थैली या एक झोला लाना भूल जाते हैं, सब्जी वाला धड़ाधड़ एक एक सब्जी अलग अलग प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर आपको पकड़ा देता है, घर आते ही मिनट भर में यह प्लास्टिक कचरे का हिस्सा बन जाता है। आप बडे बडे मॉल से सामान खरीदते हैं, दाल से लेकर मसालों तक सबकुछ आपको प्लास्टिक की थैलियों में सील किया हुआ मिलता है। कई मायनों में सुविधाजनक लगने वाले प्लास्टिक और प्लास्टिक की पैकेजिंग ने हमारे आधुनिक जीवन को बीमार बना दिया है।
प्लास्टिक एक ऐसी चीज है जिसे पूरी तरह नष्ट होने में एक हजार साल लग सकते हैं। फिर भी हम इसका अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं और इधर-उधर सड़क पर फेंक देते हैं जिसके खाने से सड़क चलती भूखी गायों की दर्दनाक मौत हो जाती है। ऐसे कई हादसों में गायों की आंतों से पंद्रह से पैंतीस किलो प्लास्टिक निकाला गया। अगर गाय इसे नहीं खाती तो यह इधर उधर फैले रहते हैं। इसमें व्याप्त रसायन भूजल में रिस जाते हैं जिससे पानी जहरीला हो जाता है और कई तरह के रोग फैलने लगते हैं। भारी बरसात में प्लास्टिक से अक्सर नालियाँ जाम हो जाती हैं।
यदि प्लास्टिक प्रबंधन पर ध्यान दिया गया होता और मीठी नदी, जिसमें मुंबई का बरसाती पानी प्रवाहित होता है, प्लास्टिक से जाम न हुई होती तो मुंबई में सन् 2005 की मूसलाधार बारिश का इतना खतरनाक दुष्प्रभाव न होता।
ऐसी समस्याओं की सूची बहुत लंबी है। प्लास्टिक का कचरा इतना खतरनाक है कि सुप्रीम कोर्ट को अंततः यह कहना पड़ा कि यह ‘टिक टिक करता हुआ टाइम बम’ है ! …..

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—विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी को शुभकामनाएं मगर संकल्प के साथ—

जैसा कि हम सभी को ज्ञात है कि पर्यावरण का मानव जीवन से महत्वपूर्ण संबंध है। सुंदर वातावरण व नजारे जहां हमारा मन हर्षित कर बैठता है, वहीं गंदा वातावरण, आवाश्यकता से अधिक गर्मी या ठंढ विभिन्न समस्या का जड़। इसलिए जलवायु परिर्वतन के कुप्रभाओं को कम करने के लिए हम सभी मिलकर संकल्प ले।

अपने आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रख कर, जल-बिजली सहित विभिन्न सुविधाओं का न्यूनतम उपयोग कर, जीवन रक्षक आक्सीजन की देन पेड़ लगा या आसपास के वातावरण को हराभरा रखकर व विभिन्न पर्यावरण संरक्षण संबंधी योजनाओं से जुड़कर इसके समर्वद्धन में अपना सहयोग दें। बहुत जरूरी है कि हम बड़े पर्यावरण के प्रति प्रेम अपने व्यवहार में दर्शाए, तभी विश्व पर्यावरण दिवस मनाना सार्थक भी होगा व हमें देखकर आने वाली पीढी यानी बच्चे भी पर्यावरण के प्रति जागरूक बन पाएंगे।

वैसे दिल्ली सरकार की ऑड इवेन योजना, डीजल पर चलने वाली या जो अधिक प्रदूषण का कारक, उस पर रोक लगाना…आदि इसी पर्यावरण संरक्षण की कड़ियां है। ऐसे ही अन्य राज्य भी प्रदूषण मुक्ति के लिए सक्रिय व विश्व स्तर पर इस हेतु चिंता व्यक्त की जा रही है। मगर सिर्फ सरकारी पहल काफी नहीं, आम जनता को भी इस पर्यावरण संरक्षण में अपना सहयोग करना पड़ेगा। तब हमारा राज्य, देश व पूरा विश्व ही सुंदर, स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त रह पाएगा। अतः विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी को शुभकामनाएं मगर संकल्प के साथ…।

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–पर्यावरण दिवस पर सभी का राष्ट्रीय कर्तव्य–

इस धरा के ज्वलन्त ताप से,हर बर्बादी सहनी होगी।
ना नीड़ हरो घर नीर भरो,ये अकथ कहानी कहनी होगी।।

उस पिपासा के प्रलय को,वृक्ष की हर खेप उगाकर।
सरकारों को समर सरिसा,नीर,नीड़ का रख प्रलयंकर।
वर्षाजल की बूँद बचाकर,कुए बावडियाँ भर भर कर।
और जगत के हर मानव को,जागकर महामानव बनकर।
नवाँकुर सदृश रवि सम,धरित्री का वक्ष चीरकर।
वैश्विकता का ताप हरने,गाँव गली हर चौराहे पर।
पर्यावरण प्रदूषण हरने,हरित धरा को करनी होगी।
इस धरा के ज्वलन्त ताप से,हर बर्बादी सहनी होगी।
ना नीड़ हरो घर नीर भरो, ये अकथ कहानी कहनी होगी।।

छल रहा है नर स्वयं को,नीर नीड़ का नाश करके।
पीढ़ियां भी देख रही है,निज जीवन की आश करके।
उदित सवेरा है हरित जो,सृष्टि का अब मान करके।
मनुज जलज उद्भिज अण्डज के,रचना हेतु नीर बचाकर।
सवा अरब की जनसंख्या को,एक वृक्ष हर साल लगाकर।

प्रकृत पुरुष का मान बचाने,तरुवर सरवर को बचाकर।
प्रदूषण के सन्ताप से अब,मुक्त कहानी कहनी होगी।
इस धरा के ज्वलन्त ताप से,हर बर्बादी सहनी होगी।
ना नीड़ हरो घर नीर भरो,ये अकथ कहानी कहनी होगी।।

कहे विटप अब मानव दल से,गरिमा मेरी गहनी होगी।
विशद विधा में वृक्ष लगाकर,शुद्ध श्वाँस को करनी होगी।
जन्म मृत्यु तक साथ देकर,अपनी रक्षा करनी होगी।
तुच्छ स्वार्थी सोच मिटाकर,हरित क्रांति अब करनी होगी।
गुनाह किया हर जीवजन्तु से,स्नेह परीक्षा देनी होगी।
केवल कागज में लिखने से,नहीं फलित अब कलियाँ होगी।
सुन्दर छाँव शान्ति की खातिर,कुछ तो मुश्किल सहनी होगी।
इस धरा के ज्वलन्त ताप से,हर बर्बादी सहनी होगी।
ना नीड़ हरो घर नीर भरो,ये अकथ कहानी कहनी होगी।।

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आइये हम सभी मिल यह संकल्प ले कि हम अपने वार्ड ,शहर , घरों एवं उसके इर्द गिर्द बरसात के मौसम में ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाएं और पर्यावरण की रक्षा करें…।

रीमा मिश्रा “नव्या”
आसनसोल(पश्चिम बंगाल)

 

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