मुझे भुलाना मत यारों, मैं भबिस्य तुम्हारा हूँ : एस एन ठाकुर
मैं कौन हूँ…….
मैं अपने देश में द्वितिय हूँ।
फिर भी मैं अद्वितीय हूँ ।।
मैं डॉक्टर हूँ इंजीनियर हूँ ।
मैं शिक्षक और परीक्षक हूँ ।।
मैं कृषक हूँ मैं मिट्टी हूँ
मैं हवा और पानी हूँ ।।
मैं सृजक हूँ ब्यापारी हूँ ।
मैं दाल भात तरकारी हूँ।।
मैं खेत हूँ खलिहान हूँ ।
मैं त्याग और बलिदान हूँ ।।
मैं कोशी हूँ मैं कमला हूँ
मैं मेची से महाकाली हूँ।।
मैं सीता हूँ मैं गौतम हूँ।
मैं बिराट और सल्हेश हूँ।
मैं मिथिला हूँ मैं लुम्बिनी हूँ।
मैं ही अवध भोजपूरा हूँ ।।
मैं ही नया प्रदेश हूँ ।
मैं ही आधा देश हूँ।।
मैं सिमा का रक्षक हूँ।
मैं प्रहरीऔर निरीक्षक हूँ ।।
मैं प्रकृतिऔर प्रयाश हूँ
मैं ही धरती आकाश हूँ।।
मैं ज्ञानी हूँ अज्ञानी हूँ
थोड़ा सा स्वाभिमानी हूँ।।
मैं धर्म हूँ कर्तब्य हूँ ।
मैं देश का बक़तब्य हूँ।।
मैं शिक्षित और अशिक्षित हूँ।
अपने घर में ही उपेक्षित हूँ।
मैं थोड़ा सा दुख ज्यादा सुख हूँ ।।
मैं कुछ भी नही बहुत कुछ हूँ।
मैं घर का हूँ तुम्हारा हूँ ।
बस थोड़ा प्यार का मारा हूँ ।।
मुझे भुलाना मत यारों ।
मैं भबिस्य तुम्हारा हूँ ।।
मैं भबिस्य तुम्हारा हूँ ।।।

सप्तरी, बननिया


