राष्ट्रीयता कहाँ गई ? नेपाल में चीनी राजदूत की सक्रियता का अर्थ : डा श्वेता दीप्ति
डा श्वेता दीप्ति, काठमांडू | नेपाल की राजनीतिक सरगर्मी में चीनी राजदूत होउ यान्छी की सक्रियता क्या सामान्य है या इसके पीछे कोई खास मकसद । नेपाल की राजनीति में हमेशा से किसी भी कदम पर भारत की सक्रियता का आरोप लगता रहा है किन्तु पिछले दिनों चीनी राजदूत होउ यान्छी जिस तरह नेपाल की राजनीतिक गलियारों में दिखती रही हैं वो अपने में कई सवालों काे जरुर जन्म देती है । नेपाल पर चीन के बढते प्रभाव से हम नकार नही सकते । पिछले कुछ सालों में वर्तमान सत्ता का चीन से नजदीकी जाहिर है । और साथ ही वर्तमान चीनी राजदूत यान्छी की के आम से लेकर खास जगहों पर उपस्थिति भी किसी से छुपी नहीं है । अभी के समय में नेपाल की राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है । प्रधानमंत्री की कुर्सी एक बार फिर खतरे में है । नए नक्शे के साथ माहोल को बदलने की प्रधानमंत्री की कोशिश कुछ समय के लिए उनके पक्ष में तो हो गई थी किन्तु कोरोना महामारी और असफल विदेश नीति के सवाल पर उन्हें उनकी ही पार्टी ने एक बार फिर कटघरे में खडा कर दिया है । इसी समय शायद बौखलाहट की स्थिति में नेकपा के आन्तरिक विवाद के समय प्रधानमंत्री का जब यह वक्तव्य आया कि नक्शा जारी करने की वजह से भारत उन्हें हटाना चाहता है तो उनकी जमकर आलोचना हुई है । इसी सबके के बीच जब चीनी राजदूत की सरगर्मी दिख रही है तो कहीं ना कहीं भारत का यह आरोप कि नक्शा जारी करने में चीन की इच्छा या दवाब है यह सिद्ध होता नजर आ रहा है ।
हालाँकि नेपाल एक स्वतंत्र राष्ट्र है जिसे किसी निर्णय के लिए अन्य किसी भी देश के दखल या सलाह की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ।
किन्तु राजनीतिक परिदृश्य में जो दिख रहा है उसमें चीन की दिलचस्पी से इनकार नहीं किया जा सकता । प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली द्वारा इस अभिव्यक्ति के साथ कि भारत उन्हें हटाना चाह रहा है और इस विवादित बयान के बाद जब नेकपा इस माँग पर अडी है कि प्रधानमंत्री को दोनों पद छोडना चाहिए तभी सत्तारुढ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के विदेश विभाग प्रमुख तथा वरिष्ठ नेता माधवकुमार नेपाल और चीनी राजदूत होउ यान्छी के बीच मुलाकात हुई है । जिसने एकबार फिर से इस बात को उछाला है कि नेपाल की आन्तरिक राजनीति में चीन हस्तक्षेप कर रहा है । हालाँकि ऐसी बातें खुलकर सामने नहीं आती इस पर कयास ही लगाए जाते हैं । खैर चर्चा इस बात की है कि चीनी राजदूत आखिर इस राजनीतिक हलचल के बीच नेता नेपाल के घर मिलने क्यों पहुँची ? दोनों के बीच किस मसले पर चर्चा हुई और बातें क्या हुई ये सामने नहीं आया है । जबकि विश्लेषक मानते है कि चीनी राजदूत की यह भागदौड प्रधानमंत्री ओली की कुर्सी बचाने के लिए है ।
राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के अध्यक्ष कमल थापा ने राजदूत यान्छी की सक्रियता को ‘रिमोट कन्ट्रोल’ की संज्ञा दी है । उन्होंने लिखा है कि ‘प्रधानमंत्री ओली कहते हैं कि- सरकार गिराने के लिए भारतीय राजदूत सक्रिय हैं । दूसरी तरफ चीनी राजदूत सरकार बचाने के लिए नेताओं के घर घर में पहुँच रही हैं । क्या इसी रिमोट कन्ट्रोल से चलने वाले लोकतंत्र से गणतंत्र का हित होगा ? राष्ट्रीयता की रक्षा होगी ?’ आपका मानना है कि जिस देश की व्यवस्था का स्वाभिमान खो जाए उस देश की राष्ट्रीयता सुरक्षित नही रह सकती ।
ऐसा नहीं है कि किसी देश के राजदूत किसी नेता से नहीं मिल सकते किन्तु सवाल मुलाकात के समय और पृष्ठभूमि को लेकर पैदा होता है । इस समय नेपाल की राजनीति संवेदनशील अवस्था में और जब यह चर्चा में है कि नेपाल की राजनीति में चीन का हस्तक्षेप बढ रहा है ऐसे में चीनी राजदूत का व्यक्ति विशेष से मिलना जाहिर है कि जिज्ञासा का विषय बनेगा । यूँ भी पिछले समय में ये बातें सामने आती रही हैं कि चीनी राजदूत किसी भी वक्त कहीं भी बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के आती जाती रही हैं ।
प्रमुख प्रतिपक्षी नेपाली कांग्रेस नेता धनराज गुरुङ ने भी इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ‘जब नेपाल की सरकार को गिराने और बचाने का काम विदेशी राजदूतों से होता है तो हमारी राष्ट्रीयता कहाँ गई ? कुर्सी गिराने और बचाने में ही राष्ट्रीयता की तिलाञ्जली दी जा रही है ?’
सत्तारुढ नेकपा के भीतर विवाद चरमोत्कर्ष में है और सभी की नजर इस पर टिकी हुई है । प्रधानमन्त्री ओली के इस्तीफा माँगने के समय वरिष्ठ नेता माधव नेपाल से चीनी राजदूत की मुलाकात को आन्तरिक राजनीति से अलग कर के नहीं देखा जा सकता है क्योंकि नेता नेपाल उस घटक से हैं जो किसी भी हालत में प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा चाहते हैं । पिछले समय में नेता नेपाल प्रधामंत्री की खुलकर आलोचना करते आए हैं । चीनी राजदूत से हुई उनकी मुलाकात में क्या चर्चा हुई यह सामने नहीं आ रहा और ना ही उन्होंने इसकी कोई जानकारी दी है । जबकि देश के कूटनीतिक प्रतिनिधि के साथ भेटवार्ता में अगर‘पूर्वप्रधानमन्त्री नेपाल ने नेपाल के हित, सुरक्षा मामले पर बातचीत की है तो यह बात नियमानुसार परराष्ट्र मन्त्रालय में रिर्पोटिङ करनी चाहिए ।
नेकपा के पार्टीे निर्णय अनुसार नक्सा सार्वजनिक होने पर भी नक्सा के कारण भारत द्वारा हटाए जाने वाले प्रधानमंत्री के विवादित विवाद के बाद, यान्छी की सक्रियता भारतीय कथन को सिद्ध करती नजर आ रही है । पिछले समय में जब प्रधानमंत्री द्वारा अध्यादेश लाया गया था तब भी यान्छी की सक्रियता इसी तरह बढी थी । और जिसकी काफी चर्चा भी हुई थी । प्रधानमंत्री की पिछले समय जब कुर्सी खतरे में पडी थी तब भी यान्छी की सक्रियता आज के जैसी ही थी । भारतीय मीडिया ने इस बात की जोरशोर से कवरेज की थी ।
किसी भी देश से आपका सम्बन्ध किसी अन्य देश के विचारों पर निर्भर नहीं होता । पर जब बात आन्तरिक राजनीति की हो तो वहाँ कोई भी स्वतंत्र राष्ट्र किसी दूसरे राष्ट्र का दखल नहीं चाहता । किन्तु नेपाल की राजनीति बिल्कुल इससे अलग रही है यहाँ हमेशा किसी ना किसी रुप में देश की राजनीति पर भारत या चीन की चर्चा होती रही है । यहाँ के इतिहास में राजनीतिक परिवर्तन में भारत की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता । यहाँ के सभी नेताओं ने भारत में रहकर यहाँ के राजनीतिक परिवर्तन की भूमि तैयार की है जो आज के लोकतंत्र की आधार बनी है । पर राष्ट्र चलाने के लिए या आन्तरिक मसलों पर किसी दूसरे राष्ट्र के हस्तक्षेप को नहीं स्वीकार किया जा सकता है । किन्तु वर्तमान समय इस उक्ति को सही साबित नहीं कर रहा ।

