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चीन मामले पर भारत को अमेरिका का पूरा साथ

 

भारत में अमेरिका के शीर्ष राजदूत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ हालिया सीमा विवाद पर भारत के साथ करीबी संपर्क और ”जबरदस्त सहयोग” बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से पिछले छह महीने अभूतपूर्व रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच मई से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कई इलाकों पर गतिरोध चल रहा है। हालात पिछले महीने तब बिगड़ गए जब गलवान घाटी में झड़प में भारत के 20 सैन्यकर्मी  की मौत हो गई थी।

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भारत में अमेरिका के राजदूत केन जस्टर ने अमेरिका भारत व्यवसाय परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित वार्षिक ‘भारत विचार शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए बुधवार (22 जुलाई) को कहा, ”अभी के लिए हम भारत की उत्तरी सीमा पर स्थिति को देख रहे हैं जिसमें चीन ने न केवल पश्चिमी सेक्टर बल्कि मध्य और पूर्व में भी विवाद पैदा किए। इन स्थितियों में हमने अपने भारतीय समकक्षों से करीबी संपर्क बनाए रखा और स्पष्ट तौर पर कहूं तो जबरदस्त सहयोग भी बनाए रखा।”

अमेरिकी राजदूत की यह टिप्पणी तब आई है जब दो दिन पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने क्षेत्र में चीनी सेना की आक्रामक गतिविधियों को ”अस्थिर” करने वाला बताया। एस्पर ने यह भी कहा कि अमेरिका वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच हालात पर ”बहुत करीबी” नजर रख रहा है।

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जस्टर ने कहा, ”हमने राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच कई बातचीतों को देखा है। विदेश मंत्री ने कई बार विदेश मंत्री जयशंकर से बात की है। मुझे लगता है कि यह वास्तव में उनके साथ संबंधों को मजबूत करता है।” उन्होंने कहा कि उप विदेश मंत्री स्टीफन बीगन ने न केवल विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ बात की, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई समकक्षों से बात की।

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जस्टर ने कहा कि दोनों देशों के बीच मंत्री स्तर की कई बातचीत हुई जिनमें वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहिजर और वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के साथ बातचीत शामिल है। उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि पिछले छह महीनों के दौरान हम एक-दूसरे के साथ बातचीत करने और विश्वास करने के एक नए स्तर पर पहुंचे हैं।”

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