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वो जागे रहे , हम सोए रहे  : इंदु तोदी

 

“वीर शहीद”

वो जागे रहे , हम सोए रहे 

आराम से इत्मीनान से  !

हम गीत गाते रहे मिलन के,

वो विरह को गले लगाते रहे! 

यहाँ हर घर रोज़ होती 

रोशनी जगमगाती !

उन की मनती कहाँ  

दीवाली कभी  !

यहाँ लगे रहते गुलाबी मेले  

खुशियों भरे  !

रंग कोई कहाँ   

उन के लिए है बने  !

मौसम सुहाना हो 

किसी के लिए ,

मेहरवान न होता वो उनके लिए ।

अरमान नही , जज़्बात नही !

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नही होती खुशियाँ उनके लिए ।

उन्होने उठाई है जो कसम,

रक्षा दिन रात डटकर करेंगे  

देश की जवान हम ।

कोई भी गम गम नहीं 

देश से बढ़कर जिनके लिए !

लुटा देते हैं 

लहू का अन्तिम कतरा भी हँस!

मचलते है माँ की आन बचाने के लिए!

श्रद्धा से सर झूका हुआ है मेरा 

उन वीर शहीद  

परिवारों के लिए !

जो एक लाल की 

चिता ठण्डी होने से पहले,

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भेज देते हैं लाल दूजा 

देश पर कुर्बानी करने के लिए !

नमन है ! 

देश के उन वीर शहीदों के लिए 

जो तत्पर है 

मातृभूमि पर जनम ले उसी पर

हर बार मरने के लिए  ! !

इन्दु तोदी, धरान, नेपाल |

देश पर न्यौछावर होने वाले वीर शहीद प्रति  ससम्मान श्रद्धांजली स्वरुप यह रचना भेट     

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