Sun. Sep 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

सिमट कर अपने सूनेपन में : लक्ष्मण नेवटिया

Laxman Nevatiya
 

बूढ़ा आम का पेड़

अब मोजराता नहीं है ,
बूढ़ा आम का पेड़ ,
बगीचे के बीच खड़ा तो है,
पर किसी को सुहाता नहीं है,
बूढ़ा आम का पेड़।

माली ने खाए हैं इसके मीठे आम
पर अब पैसों के लालच में सोचकर करने काम तमाम
लकड़हारे को बुला
अपने दिल की बात बताई
लकड़हारे ने साफ़ कह दी
हरेभरे वृक्ष को काटने की मनाही,
माली क्यों इतना स्वार्थी हो गया है
कुछ समझ नहीं पाता है
बूढ़ा आम का पेड़।

यह भी पढें   सिंहदरबार के प्रशासकीय केन्द्र में कार दुर्घटना

कल तक वही तो उठाता था
माली के घर के खर्च का भार,
उसके ही पत्तों से बनती थी
घर की ही नहीं पूरे मुहल्ले के
हर घर की बन्दनवार ।
जब माली बच्चा था
उसकी ही छाँव में तो पला था ,
जब हुआ जवान
विवाह के फेरों की अग्नि के साथ
वो ही तो जला था
बनता था वर्षभर का
उसकी ही खट्टी केरियों से घर में अचार।
पक्षियों के घोंसलों का वही था आधार,
पर अब,जब उसको सहारे की ज़रुरत है
एकाएक बदला देख मालीका व्यवहार
क्यों ऐसा हो गया है आदमी
दीर्घश्वास छोड़ कुंठित हो,
सिमट कर अपने सूनेपन में-
कट मर जाना चाहता है
भिंचा-भिंचा सा,घुटा-घुटा सा
बूढ़ा आम का पेड़।

यह भी पढें   एनपीएल के तीसरे संस्करण में पहला मैच लुम्बिनी लायंस और सुदूरपश्चिम रोयल्स बीच
लक्ष्मण नेवटिया,
विराटनगर -९

– लक्ष्मण नेवटिया·, बिराटनगर

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com