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रूस में डिवेलप किया गया कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी सुरक्षित और प्रभावी

 

रूस की ओर से डिवेलप किया गया कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी दो शुरुआती फेज के ट्रायल में सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है। शुक्रवार को जारी परिणाम में बताया गया है कि वैक्सीन का सेफ्टी प्रोफाइल अच्छा है और टीका लगाए जाने के 42 दिन बाद तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ। वैक्सीन ने 21 दिन के भीतर मजबूत एंटीबॉडी भी पैदा करने में सक्षम है।

मेडिकल जर्नल लेंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हिस्से वाले वैक्सीन में दो adenovirus वेक्टर्स हैं, जिसे SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन प्रगट करने के लिए मोडिफाइ किया गया है। इस तरह के पुनः संयोजक एडेनोवायरस वैक्टर का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। कई क्लीनिकल स्टडीज में इसके सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है। इस समय कई कोविड-19 वैक्सीन कैंडिडेट इन वेक्टर्स का इस्तेमाल करते हुए SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करते हैं।

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जुलाई में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल के परीणाम ने दिखाया कि कोई प्रारंभिक सुरक्षा चिंता नहीं है, जिसमें दोनों इम्यून सिस्टम में प्रभावी इम्यून पैदा करना शामिल है। जर्नल ने कहा कि ट्रायल के सेकेंड्री परिणाम ने भी दिखाया कि वैक्सीन 28 दिन के भीतर T सेल (एंटीबॉडी) पैदा करने में सक्षम है।

पत्रिका में बताया गया है कि दो छोटे फेज 1/2 का ट्रायल 42 दिनों तक चला, इनमें से एक वैक्सीन के फ्रोजन फॉर्म्यूलेशन का और दूसरे में फ्रीज-ड्राइज फॉर्म्यूलेशन का अध्ययन किया गया। फ्रोजन फॉर्म्युलेशन का इस्तेमाल वैक्सीन को बड़े पैमाने पर मौजूदा स्पलाई चेन के जरिए वितरण को लेकर किया जाएगा। फ्रीज-ड्राइड फॉर्म्यूलेशन का इस्तेमाल उन इलाकों के लिए किया जाएगा जहां पहुंचना मुश्किल है। इन्हें 2 से -8 डिग्री तापमान पर स्टोर किया जा सकता है।

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दो एडनोवायरस वेक्टर्स के इस्तेमाल की वजह बताते हुए गमालिया नेशनल रिसर्च सेंटर के मुख्य लेखक डेनिस लोगूनोव ने कहा, ”जब एडनोवायरस वैक्सीन लोगों के सेल्स में प्रवेश करते हैं, वे SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन जेनेटिक कोड डिलिवर करते हैं, जिसकी वजह से सेल्स स्पाइक प्रोटीन पैदा करते हैं। यह इम्यून सिस्टम को SARS-CoV-2 वायरस की पहचान कर उस पर हमला करना सिखाता है। SARS-CoV-2 के खिलाफ शक्तिशाली इम्यून प्रतिक्रिया पैदा करने के लिए बूस्टर वैक्सीनेशन महत्वपूर्ण है।”

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ट्रायल को रूस के दो हॉस्पिटलों में अजाम दिया गया, जिसमें 18-60 वर्ष तक के स्वस्थ व्यस्कों को शामिल किया गया। रजिस्ट्रेशन के बाद इन्हें आइसोलेट कर दिया गया और टीका लगने के बाद 28 दिनों तक अस्पताल में ही रहे। लेखक ने कहा है कि वैक्सीन के मूल्यांकन के लिए अलग-अलग जनसंख्या, बुजुर्गों, अलग मेडिकल कंडीशन के लोगों और जोखिम वाले लोगों पर रिसर्च की आवश्यकता है।

हिन्दुस्तान से

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