Thu. Jul 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

जल में मचलती मछली बुलाती… : करुणा वन्त

 
छू–मन्तर : करुणा वन्त


जल में मचलती मछली बुलाती
आ उतर झील में, मुझे छुकर दिखा

गाती कोयल छज्जे से पुकारती
आ सुर में मेरे, तू अपना सुर तो मिला

आकाश में इठलाती पंछी कहती
उड़ के तू जल्दी से, पास तो मेरे आ जरा

सहमी हिरनी जंगल में कहती
कूद, थोड़ा सैर में मेरा साथ तो निभा

आँगन में लेटी अम्मा चिल्लाती
छोड़ सब कुछ, आ जरा मेरा दिल तो बहला

बातें सबकीे सुन, भागती हूँ मै उनके संग
बोल बैठ कूद फाँद, ले लेती हूँ थोड़ा सा आनन्द

साथी मेरे बड़े फुर्तीले, कभी ना जैसे ये थके रे
सपनाें में भी मेरे आकर प्रोत्साहन ही सदा करें

हौसले मेरे अन्दर फूंक कर, उड़ान ये मेरे साथ भरे
खुशी हो या गम,साथमेरे ये हरदम बसे

जन्म से ज्यादे कर्मों के रिश्तों में
हर रोजÞ मेरा विश्वास बढे

मछली जल की रानी, है बड़ी सयानी
जल के अन्दर डुबा मुझे, सारे क्लेश धुलवाती

कोयल काली बड़ी निराली
बिखरे पड़े मेरे सुरों को जोड़–जाड़ कर मधुर बनाती

पँछी सारे बड़े मतवाले
बोझ बिसरा हल्का हो उड़ना सिखलाते

हिरनी चंचल, है सबसे कुशल
सैर में कराती, नये दोस्तों से जुगल

अम्मा मेरी बड़ी दिलवाली
जीवन जीने के नुस्खे लिखवाती

एैसे रिश्ते लाते जीवन में अन्तर
जादू जैसे सारे दुःख हो जाते छू–मन्तर
डा.करुणा वन्त, काठमाडौं
 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed