Wed. Apr 22nd, 2026
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‘कुछ लोग जिंदगी होते हैं । कुछ लोग जिÞंदगी में होते हैं । कुछ लोगों से जिंदगी होती है और कुछ लोग होते हैं, तो जिंदगी होती है ।’ इस तथ्य को उजागर करता है कि इंसान अकेला नहीं रह सकता, उसे चंद लोगों के साथ की सदैव आवश्यकता होती है और उनके सानिध्य से जिंदगी हसीन हो जाती है । वास्तव में वे जीने का मकÞसद होते हैं । इसीलिए कहा जाता है कि दोस्त, किताब, रास्ता और सोच सही व अच्छे हों, तो जीवन उत्सव बन जाता है और गÞलत हों, तो मानव को गुमराह कर देते हैं । सो ! दोस्त सदा अच्छे, सुसंस्कारित, चरित्रवान् व सकारात्मक सोच के होने चाहिएं । परंतु यह तभी संभव है, यदि वे अच्छे साहित्य का अध्ययन करते हैं, तो सामान्यतः वे सत्य पथ के अनुगामी होंगे और उनकी सोच सकारात्मक होगी । यदि मानव को इन चारों का साथ मिलता है, तो जीवन उत्सव बन जाता है, अन्यथा वे आपको उस मुकÞाम पर लाकर खड़ा कर देते हैंस जहां का हर रास्ता अंधी गलियों में जाकर खुलता है और लाख चाहने पर भी इंसान वहां से लौट नहीं सकता । इसलिए अच्छे लोगों की जीवन में बहुत अहमियत होती है । वे हमारे प्रेरक व पथ–प्रदर्शक होते हैं और उनसे स्थापित संबंध शाश्वत् होते हैं ।

यह भी अकाट्य सत्य है कि रिश्ते कभी कÞुदरती मौत नहीं मरते, इनका कत्ल इंसान कभी नपÞmरत, कभी नजÞरांदाजÞी, तो कभी गÞलतफÞहमी से करता है, क्योंकि घृणा में इंसान को दूसरे के गुण और अच्छाइयां दिखाई नहीं देते । कई बार इंसान अच्छे लोगों के गुणों की ओर ध्यान ही नहीं देता, उनकी उपेक्षा करता है और गÞलत लोगों की संगति में फंस जाता है । इस प्रकार दूसरे के प्रति गÞलतफÞहमी हो जाती है । अक्सर वह अन्य लोगों द्वारा उत्पन्न की जाती है और कई बार हम किसी के प्रति गÞलत धारणा बना लेते हैं । इस प्रकार इंसान अच्छे लोगों को नजÞरांदाजÞ करने लग जाता है और उनकी सत्संगति व साहचर्य से वंचित हो जाता है ।

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परंतु संसार में यदि मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करने वाला कोई है, तो वह प्रेम है और उसका सबसे बड़ा साथी है आत्मविश्वास । सो ! प्रेम ही पूजा है । प्रेम द्वारा ही हम प्रभु को भी अपने वश में कर सकते हैं और आत्मविश्वास रूपी पतवार से कठिन से कठिन आपदा का सामना कर, सुनामी की लहरों से भी पार उतर कर अपनी मंजिÞल तक पहुंच सकते हैं । इस प्रकार प्रेम व आत्मविश्वास की जीवन में अहम् भूमिका है, उन्हें कभी खुद से अलग न होने दें । इसलिए किसी के प्रति घृणा व मोह का भाव मत रखें, क्योंकि वे दोनों हृदय में स्व–पर व राग–द्वेष के भाव उत्पन्न करते हैं । मोह में हम अंधे हो जाते हैं और हमारी स्थिति उस अंधे की भांति हो जाती है, जो सब कुछ अपनों को दे देना चाहता है । मोह के भ्रम में इंसान सत्य से अवगत नहीं हो पाता और गÞलत काम करता है । वह राग–द्वेष का जनक है और उसे त्याग देना ही श्रेयस्कर है । हम सब एक–दूसरे पर आश्रित हैं और एक–दूसरे के बिना अधूरे व अस्तित्वहीन हैं… यही रिश्तों की गरिमा है, खूबसूरती है । इसीलिए कहा जाता है ‘दिल पर न लो उनकी बातें रजो दिल में रहते हैं’ अर्थात् जिन्हें आप अपना स्वीकारते हैं, उनकी बातों का बुरा कभी मत मानें । वे सदैव आपके हित मंगल कामना करते हैं, गÞलत राहों पर चलने से आपको रोकते हैं, विपत्ति व विषम परिस्थिति में ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं । हमें उनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए । जब हम यह समझ लेते हैं कि ‘वे गलत नहीं हैं, भिन्न हैं । उस स्थिति में सब शंकाओं व समस्याओं का अंत हो जाता है, क्योंकि हर इंसान का सोचने का ढंग अलग होता है ।’

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‘जिÞंदगी लम्हों की किताब है । सांसों व ख्यालों का हिसाब है । कुछ जÞरूरतें पूरी, कुछ ख्वाहिशें अधूरी । बस इन्हीं सवालों का जवाब है जिÞंदगी ।’ सांसों का आना–जाना हमारे जीवन का दस्तावेजÞ है । जीवन में कभी भी सभी ख्वाहिशें पूरी नहीं होतीं, परंतु जÞरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं । वास्तव में जिÞंदगी इन्हीं प्रश्नों का उत्तर है और बड़ी लाजवाब है । इसलिए मानव को हर क्षण जीने का संदेश दिया गया है । शायद ! इसलिए कहा जाता है कि ख्वाहिशें तभी मुकम्मल अर्थात् पूरी होती हैं । जब शिद्दत से भरी हों और उन्हें पूरा करने की । मन में इच्छा व तलब हो । तलब से तात्पर्य है, यदि आपकी इच्छा शक्ति प्रबल है, तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं । आप आसानी से अपनी मंजÞिल को प्राप्त कर सकते हैं और हर परिस्थिति में सफलता आपके कदम चूमेगी ।

सो ! कुछ बातें, कुछ यादें, कुछ लोग और उनसे बने रिश्ते लाख चाहने पर भी भुलाए नहीं जा सकते, क्योंकि उनकी स्मृतियां सदैव जÞहन में बनी रहती हैं । जैसे इंसान अच्छी स्मृतियों में सुकÞून पाता है और बुरी स्मृतियां उसके जीवन को जहन्नुम बना देती हैं । इसीलिए कहा जाता है कि जो भी अच्छा लगे, उसे ग्रहण कर लो, अपना लो, क्योंकि यही सबसे उत्तम विकल्प होता है । जो मानव दोष–दर्शन की प्रवृत्ति से निजात नहीं पाता, सदैव दुःखी रहता है । अच्छे लोगों का साथ कभी मत छोड़ें, क्योंकि वे तकÞदीर से मिलते हैं । दूसरे शब्दों में वे आपके शुभ कर्मों का फल होते हैं । ऐसे लोग दुआ से मिलते हैं और कुछ लोग दुआ की तरह होते हैं जो आपकी तकÞदीर बदल देते हैं । इसलिए कहा जाता है, ‘रिश्ते वे होते हैं, जहां शब्द कम, समझ ज्यादा हो । तकÞरार कम, प्यार ज्यादा हो । आशा कम, विश्वास ज्यादा हो । यही है रिश्तों की खूबसूरती ।’ जब इंसान बिना कहे दूसरे के मनोभावों को समझ जाए, वह सबसे सुंदर भाषा है । मौन विश्व की सर्वोत्तम भाषा है, जहां तकÞरार अर्थात् विवाद कम, संवाद ज्यादा होता है । संवाद के माध्यम से मानव अपनी प्रेम की भावनाओं का इजÞहार कर सकता है । इतना ही नहीं, दूसरे पर विश्वास होना कारगÞर है, परंतु उससे उम्मीद रखना दुःखों की जनक है । इसलिए आत्मविश्वास संजोकर रखें, क्योंकि इसके माध्यम से आप अपनी मंजिÞल पर पहुंच सकते हैं ।

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सुख मानव के अहं की परीक्षा लेता है और दुःख धैर्य की और दोनों परीक्षाओं में उत्तीर्ण व्यक्ति का जीवन सफल होता है । सो ! मानव को सुख में अहंकार से न फूलने की शिक्षा दी गई है और दुःख में धैर्यवान बने रहने को सफलता की कसौटी स्वीकारा गया है । अहं मानव का सबसे बड़ा शत्रु व सभी रोगों की जड़ है । वह वर्षों पुरानी मित्रता में पल भर में सेंध लगा सकता है, पति–पत्नी में अलगाव का कारण बन सकता है । वह हमें एक–दूसरे के कÞरीब नहीं आने देता । इसलिए अच्छे लोगों की संगति कीजिए, उनसे संबंध बनाइए, कानों–सुनी बात पर नहीं, आंखों देखी पर विश्वास कीजिए । स्व–पर व राग–द्वेष को त्याग ‘सर्वेभवंतु सुखीनाम्’ को जीवन का मूलमंत्र बना लीजिए, क्योंकि इंसान का सबसे बड़ा शत्रु स्वयं उसका अहम् है । सो ! उससे सदैव कोसों दूर रहिए । सारा संसार आपको अपना लगेगा और जीवन उत्सव बन जाएगा ।

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