संसद् बिघटन प्रतिगामी कदम, अब सशक्त आन्दोलन शुरु करना चाहिएः जनजाति महासंघ
काठमांडू, १९ जनवरी । नेपाल आदिवासी जनजाति महासंघ ने संसद् बिघटन प्रतिगामी कदम मानते हुए इसके विरुद्ध सशक्त आन्दोलन शुरु करने के लिए आग्रह किया है । महासंघ के अध्यक्ष जगत बराम ने मंगलबार एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने संसद् बिघटन कर असंवैधानिक काम किया है, इसके विरुद्ध सशक्त आन्दोलन शुरु करना चाहिए । इसके लिए सभी सरोकारवाला पक्ष को अपने–अपने जगह से आन्दोलन शुरु करने के लिए भी उन्होंने आग्रह किया है ।
जारी विज्ञप्ति में कहा है– ‘नागरिक हक और अधिकार की प्रतिरक्षा के लिए सभी आदिवासी जनजाति, मधेशी, महिला, दलित, मुस्लिम, अपाङ्ग, यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यक समूह को इकठ्ठा होना होगा, नागरिक समाज, राजनीतिक दल, मानवअधिकारकर्मी, बुद्धिजीवी, प्राध्यापक, शिक्षक, कलाकर्मी, पेशाकर्मी, लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, रंगकर्मी, युवा, विद्यार्थी, मजुदर, उद्योग व्यवसायी, अभियन्ता एवम् सम्पूर्ण सचेत नागरिकों सजग और संघर्षरत रहने के लिए अपील की जाती है ।’
विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख है कि संघर्ष बिना कोई भी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता । महासंघ को मानना है कि संवैधानिक मर्म के विपरित संसद् बिघटन करना प्रतिगमनकारी कमद है । बराम ने अपने विज्ञप्ति में कहा है कि इसके पीछे प्रधानमन्त्री ओली का ही हाथ है ।

