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नेपाल में भारतीय महिलाओं को अपना स्थान बनाने के लिए रोज़ एक अग्नि परीक्षा से गुज़रना पड़ता है : गीता कोछर जयसवाल

Geeta Kochad Jayaswal
 

डॉ. गीता कोछड़  जयसवाल | जब भी हम भारत-नेपाल मैत्री संबंधों की बात करते हैं, तब सबसे पहले हमारे विचारों में रोटी-बेटी संबंधों की बात आती है! इस रोटी-बेटी संबंध को हम भारत-नेपाल संबंधों का मूल आधार मानते हैं! यह सदियों से चली आ रही उस परंपरा को दर्शाता है जिससे भारत और नेपाल के बीच एक अटूट रिश्ता बनता है! यह रिश्ता प्रेम का प्रतीक है और एक उत्कृष्ट संस्कृति को दर्शाता है! इसलिए भारत-नेपाल के संबंध आज भी मज़बूत है, क्योंकि वह एक अटूट रिश्ते से जुड़े हैं, और वह रिश्ता है – शादी का बंधन!

प्राचीन काल में राज्यों के बीच संबंध बनाने के लिए शादी के रिश्ते को महत्वपूर्ण माना जाता था! जिन भी दो राज्यों के बीच युद्ध की संभावना होती थी, वहाँ मैत्री बनाने के लिए शादी के संबंध का प्रयोग किया जाता था! लेकिन आज कई विद्वानों ने उन संबंधों को अलग दृष्टि से देखा है! वह मानते हैं कि एक कमज़ोर राज्य अपनी बेटियों को एक शक्तिशाली राजा या उस राज्य के उच्च अधिकारियों के साथ शादी के संबंधों में बाँध देता था, ताकि युद्ध होने की संभावना ख़त्म हो जाए और मैत्री संबंध बन जाएं! इस परंपरा के चलते कई ऐसे शक्तिशाली राजा हुए जिन्होंने कई कमज़ोर राज्यों की बेटियों के साथ शादी के संबंध बनाए और मैत्री संबंध स्थापित कर उनको अपने अधीन कर लिया! इस तरह के प्रचलन को आज के विद्वान और सशक्त महिलाएँ अच्छी दृष्टि से नहीं मापती! उनका मानना यह है कि यह कमज़ोर राज्यों पर राज करने का एक तरीक़ा था और इसके चलते कई महिलाओं का शोषण हुआ था! आज के समय की बात करें तब इस तरह के रिश्ते बनाना महज़ एक स्त्री या पुरुष की अपनी स्वतंत्रता पर निर्भर है! ऐसा कम देखा जाता है कि एक शक्तिशाली राज्य किसी कमज़ोर राज्य की महिलाओं का शोषण करें या उस राज्य को अपने अधीन करने के लिए शादी के संबंध बनाए!

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भारत-नेपाल संबंधों की बात करें तब विश्व स्तर पर भारत प्राचीन काल से अब तक एक बड़ा और शक्तिशाली देश माना जाता राहा है! दूसरी तरफ़ नेपाल एक छोटा प्रदेश माना जाता है! मगर इनके मैत्री संबंधों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण पहलू शादी के संबंध हैं, जो की आज भी उतने ही प्रभावशाली है जितने कभी प्राचीन काल में रहे होंगे! मगर उत्कृष्ट बात यह है कि यह मैत्री संबंध किसी राज्य का दूसरे राज्य पर बल प्रयोग करने का प्रतीक नहीं है और न ही ये संबंध किसी राज्य को अपने अधीन करने के तात्पर्य से बनाए गए हैं! इसका प्रमाण देने की आवश्यकता तो नहीं मगर जब हम यह देखते हैं कि ज़्यादातर भारत की महिलाएँ नेपाल में शादी कर के जाती है, तब यह अपने आप स्पष्ट हो जाता है की भारत जैसा शक्तिशाली देश नेपाल के साथ ना तो युद्ध का कभी कोई विचार रखा था और न ही शादी जैसे पवित्र संबंधों को नेपाल जैसे छोटे राज्यों को अपने अधीन करने के लिए प्रयोग किया! ये संबंध सिर्फ़ और सिर्फ़ एक परंपरा का प्रतीक है जहाँ हिंदू धर्म के आधार पर रिश्तों की बुनियाद क़ायम होती है! इन रिश्तों का नाम रोटी-बेटी के संबंधों से प्रचलित है, जहाँ पर रोटी वह नेपाल की मानते हैं और बेटी भारत से जाती है या तो बेटी नेपाल की होती है और रोटी वो भारत में खाती है!

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हालाँकि भारत-नेपाल के बीच यह संबंध प्राचीन काल से चले आ रहे हैं लेकिन ज़्यादातर इन रिश्तों का प्रचलन नेपाल के तराई क्षेत्र में देखा जाता है! कुछ नेपाल की ऐसी शक्तियां रही है जो इन संबंधों को तोड़ने का प्रयास करती रही है! उसमें से कुछ शक्तियां अपने आप को राष्ट्रवादी ताक़तों के रूप में प्रख्यात करते हैं और कुछ देश के हित की बातों का उलाहना देकर भारत-नेपाल मैत्री संबंधों में खटास भरने का प्रयास करते रहते हैं! ऐसे ही कुछ प्रयासों का असर नेपाल के 2015 के संविधान में प्रतीत होता है! इस संविधान के चलते नेपाली आदमी से शादी की हुई भारतीय महिला को एक विदेशी महिला के रूप में दर्शाया गया है, जो की मैत्री संबंधों को नेपाल की संप्रभुता और अखंडता की बड़ी चुनौती मानते हैं! यही कारण है कि आज नेपाल में शादी करके गई हुई भारतीय महिलाओं का स्तर नीचे हो गया है! वह घर की लक्ष्मी होते हुए भी बाहर की एजेंट कहलाई जाती है! उनके विचारों या सशक्तिकरण के हर प्रयासों को भारत की एक योजना के रूप में देखा जाता है! अगर वह हिंदी का प्रयोग भी प्रचलित करती है तब उन्हें हिंदू राष्ट्र बनाने की योजना का एक सूत्र माना जाता है! ऐसा कहने वाले नेपाली या वो राष्ट्रवादी शक्तियां यह भूल जाती है की नेपाल एक हिन्दू राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ था और उसकी मूल धारा हिन्दू धर्म है!

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हर राज्य की अपनी एक सभ्यता और संस्कृति होती है, जिसकी वजह से वह दूसरे देश से अलग माना जाता है! लेकिन भारत और नेपाल की सभ्यता और संस्कृति की धारा एक है, और उस धारा को जोड़ने और मज़बूत करने की डोर महिलाएँ हैं! परंतु आज वही महिलाएँ नेपाल में अपना स्थान ढूंढ रही है ! नेपाल में जहाँ एक तरफ़ पहाड़ी महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है और उन्हें एक उच्च दर्जा मिलता है, वही मधेस में रह रही भारतीय महिलाओं को अपना स्थान बनाने के लिए रोज़ एक अग्नि परीक्षा से गुज़रना पड़ता है! उन्हें यह साबित करना पड़ता है कि वह नेपाल को अपना घर मानती है और मूल रूप से नेपाली है! इस संघर्ष में ना तो वह भारत सरकार से कोई सहयोग की प्रार्थना कर सकती है क्योंकि अब वह नेपाल की नागरिक हैं, और ना ही नेपाल की सरकार उन्हें नेपाली नागरिक होने के समान अधिकार देती है! उनकी आवाज़ तराई क्षेत्र की सीमा में ही गूंजती रहती है और कभी भी सिंघ दरबार के स्तंभ नहीं हिलाती! वह स्तंभ आज इस क़दर इन महिलाओं के अधिकारों पर स्थापित कर दिए गए हैं की समानता का विचार भी नेपाल की राष्ट्रवादी ताक़तों से कुचल दिया जाएगा! क्या आज विश्व में कोई ऐसी शक्ति है जो इनकी पीड़ा को सुन सकती है और नेपाल के इस संविधान को बदलने पर ज़ोर दे सकती है? या फिर इन महिलाओं का जीवन यूँ ही नेपाल की हाशिये कम्युनिटी और समाज के किनारों पे बस रहे लोगों की तरह बीतेगा ?

Geeta Kochad Jayaswal
डॉ. गीता कोछड़  जयसवाल, गीता कोछड़ जायसवाल
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर,
चीन के फूतान विश्वविद्यालय, फूतान विकास संस्थान में दक्षिण एशिया की राजदूत

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1 thought on “नेपाल में भारतीय महिलाओं को अपना स्थान बनाने के लिए रोज़ एक अग्नि परीक्षा से गुज़रना पड़ता है : गीता कोछर जयसवाल

  1. डाॅ कोछड़ का लेख यथार्थ को परिलक्षित करता है। वैसे तो रोटी बेटी और सम्बन्ध आदि काल से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहें है और आज भी यह वैश्विक सत्य है। बेटियों से घरों का माहौल बदल जाता है, विवाह उपरांत दो घरों को जोड़ती है, बेटियां न जाने कितने सम्बन्धों को नवोन्मुख करती है‌। सरकार में भी हमारी शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री को ही देख लें, उनकी सादगी व सोहार्द पूर्ण स्पष्ट वादिता सभी को प्रिय लगती है। सुन्दर प्रस्तुति के लिए कोछड़ जी को साधुवाद।

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