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अथक प्रयास का परिणाम है ‘विश्व नारी दिवस’ की परिकल्पना : रश्मि सिंह

rashmi singh
 
rashmi singh
रश्मि सिंह
एडवोकेट, पटना हाईकोर्ट
पटना, बिहार, भारत

‘विश्व नारी दिवस’ की परिकल्पना किसी एक क्षण में ली गई किसी अलहङ कल्पना की परिणति नहीं है । यह वर्षो के अथक प्रयास का परिणाम है । इसलिए इसके औचित्य पर सवाल उठना बेबुनियाद फितूर माना जाएगा । औरत भोग्या रही है सिर्फ कविताओं में ही नहीं, घर और बाहर समान रूप से । उसकी हैसियत कानून का हाथ पा लेने से थोड़ी सुरक्षित जरूर हुई है, बढ़ी नहीं है ।

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आज भी वह घर के बाहर रंग–रोगन युक्त वस्तु है और चहारदीवारी के अंदर एक चलती फिरती मशीन जिसे मन के पंख खुद कतर लेने चाहिए या नोचने के लिए प्रस्तुत कर देने चाहिए । दुखद है महिलाओं की सहभागिता भी रही है सह–अभियुक्त की भूमिका में । कुछ अपवादों का सामान्यीकरण अतिशयोक्ति होगी ।

मेरा मानना है कि यह दिवस हम से हमारा साक्षात्कार का ही सिर्फ दिवस नही है, उन तमाम महानुभावों, जिसमें बेशकÞ प्रगतिवादी पुरूष भी शामिल हैं, को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का भी दिन है, जिन्होने महिला को एक आवाजÞ दी । शुक्रिया

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